
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था प्रभावी हो गई है। इसके तहत अब जन्म और मृत्यु की घटना के पंजीकरण में देरी होने पर अलग-अलग शुल्क, दस्तावेज और सक्षम पदाधिकारियों की अनुमति अनिवार्य होगी।
जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके लिए संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार, यानी नगर परिषद या ग्राम पंचायत के अधिकृत पदाधिकारी के पास आवेदन करना होगा।
आवेदन के साथ अस्पताल की पर्ची और माता-पिता का आधार कार्ड देना आवश्यक होगा। इससे निर्धारित समय के भीतर प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया सरल और निःशुल्क रहेगी।
वहीं, नए नियम के तहत 21 से 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर दो रुपये विलंब शुल्क के साथ शपथ पत्र देना होगा। यदि 30 दिनों से एक वर्ष तक की देरी होती है, तो पांच रुपये विलंब शुल्क के साथ आवेदन करना होगा।
इस अवधि में पंजीकरण के लिए जिला रजिस्ट्रार या अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति जरूरी होगी। आवेदक को आवेदन पत्र, देरी का कारण, विलंब शुल्क और आवश्यक सत्यापन से संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे।
इसी तरह, एक वर्ष से दो वर्ष तक की देरी होने पर 10 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। इस अवधि में पंजीकरण के लिए जिला पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी या जिला पदाधिकारी की ओर से अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी का आदेश आवश्यक होगा। सभी संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों का सत्यापन कराने के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना अनिवार्य होगा।
इस स्थिति में 10 रुपये विलंब शुल्क के साथ संबंधित साक्ष्य, आवश्यक दस्तावेज और गवाहों के बयान के आधार पर पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के आदेशानुसार प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी होगी।









