मान सरकार ने वर्ष 2025 में किसानों की खुशहाली के लिए की गईं अहम पहलें

चंडीगढ़, 25 दिसंबर:
मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की पहलों के चलते वर्ष 2025 में पंजाब के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा गन्ने की फसल के दामों में किए गए रिकॉर्ड इजाफे, फसल विविधीकरण अभियान और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण प्रदेश में कृषि खुशहाली के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है।
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री सरदार गुरमीत सिंह खुड्डियां ने वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि हमारी योजनाओं ने मिसाल कायम की है और गन्ने की कीमत में किया गया रिकॉर्ड इजाफा किसानों की कड़ी मेहनत के सम्मान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने देश में गन्ने के लिए सबसे अधिक 416 रुपये प्रति क्विंटल की दर से स्टेट एग्रीड प्राइस (एसएपी) देने की घोषणा की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 रुपये अधिक है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के गन्ना उत्पादकों को देश भर में सबसे अधिक कीमत प्राप्त हो।
राज्य सरकार के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप चालू खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस वर्ष पराली जलाने के मामले घटकर 5,114 रह गए, जबकि वर्ष 2024 में इनकी संख्या 10,909 थी। सरकार द्वारा वर्ष 2018 से अब तक किसानों को 1.58 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें सब्सिडी पर प्रदान की जा चुकी हैं। इस वर्ष 16,000 से अधिक स्वीकृति पत्र जारी किए गए हैं।
इस वर्ष फसल विविधीकरण में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है। इसके तहत कपास की खेती का रकबा 20 प्रतिशत बढ़कर 1.19 लाख हेक्टेयर हो गया है और किसानों को पीएयू द्वारा अनुशंसित बीटी कॉटन बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 52,000 से अधिक किसानों ने बीज सब्सिडी का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है, जो सरकारी पहलों पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
कृषि मंत्री ने बताया कि भूमिगत जल संरक्षण के लिए लागू की गई धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक, जिसके अंतर्गत किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाती है, को किसानों से व्यापक समर्थन मिला है। इस वर्ष इस तकनीक के अंतर्गत रकबे में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में यह रकबा 2.53 लाख एकड़ था, जो इस वर्ष बढ़कर 2.96 लाख एकड़ हो गया है।
बासमती की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 6.81 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस वर्ष 6.90 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह वृद्धि इस फसल को पंजाब के किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प के रूप में स्थापित करती है, जो घरेलू और निर्यात दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फसल विविधीकरण के लिए किए गए प्रयासों के तहत वर्ष 2025 को उस वर्ष के रूप में याद किया जाएगा, जब पंजाब ने धान के फसल चक्र को तोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए। राज्य के छह जिलों—बठिंडा, संगरूर, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला और पठानकोट—में धान के स्थान पर खरीफ मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन जिलों में 11,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में किसानों ने धान की जगह मक्का की खेती की, जिसके अंतर्गत मक्का उत्पादकों को 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, आरकेवीवाई के तहत 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की पूरक सहायता तथा एसएएस नगर और रोपड़ जिलों में 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मक्का बीज पर सब्सिडी की व्यवस्था ने बड़े बदलाव की मजबूत नींव रखी है।
सरदार गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा,
“किसानों को सशक्त बनाने का हमारा संकल्प टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। कपास बीजों पर सब्सिडी, डीएसआर और फसल विविधीकरण जैसी योजनाओं ने उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। गन्ने की रिकॉर्ड कीमत किसानों की मेहनत के सम्मान के प्रति हमारे वादे को दर्शाती है। पंजाब सरकार वर्ष 2026 में भी नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल खेती पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी।”









