
चंडीगढ़, 13 जनवरी
संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा और लंबे समय से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को दूर करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसले में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले निवासियों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़े, नागरिक-केंद्रित सुधार पेश किए हैं। मुख्यमंत्री, जिनके पास सहकारिता विभाग भी है, के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने सहकारी हाउसिंग संपत्तियों की रजिस्ट्री को किफायती, सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक ढांचे को मंजूरी दी है। इसके साथ ही राज्य के लिए स्टांप ड्यूटी की वैध वसूली भी सुनिश्चित की गई है।
इस फैसले का विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में संपत्ति के हस्तांतरण को कानूनी रूप देने के लिए दूरगामी कदम उठाए हैं। इनमें से कई सोसायटियां दशकों से बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही थीं। प्रवक्ता ने कहा, “मुख्यमंत्री ने कई सुधारों को मंजूरी दी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में संपत्ति के हस्तांतरण औपचारिक रूप से पंजीकृत हों, कानूनी रूप से सुरक्षित हों और नागरिकों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हों। साथ ही राज्य के राजस्व हितों की भी रक्षा हो सके।”
मुख्य प्रस्तावों का विवरण देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि सहकारी हाउसिंग सोसायटियों द्वारा अपने मूल सदस्यों के पक्ष में किए गए मूल आवंटन के दस्तावेजों को स्टांप ड्यूटी से पूरी तरह छूट दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी रजिस्ट्रेशन केवल दर्शाए गए मूल्य पर मामूली रजिस्ट्रेशन शुल्क के साथ की जा सकेगी। उन्होंने आगे कहा कि राजस्व विभाग द्वारा परिभाषित एवं अधिसूचित अनुसार यह छूट कानूनी वारिसों, जीवनसाथी और योग्य पारिवारिक सदस्यों को भी दी गई है, ताकि वास्तविक उत्तराधिकारियों के मामले पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।
हजारों परिवारों को अपने घरों के लिए स्पष्ट कानूनी स्वामित्व दिलाने के उद्देश्य से सरकार ने 12 जनवरी 2026 को अधिसूचित गैर-मूल आवंटियों और ट्रांसफर मामलों के लिए अत्यंत रियायती, समयबद्ध स्टांप ड्यूटी दरें लागू की हैं। प्रवक्ता ने बताया कि इस निर्णय के तहत 31 जनवरी 2026 तक पूरी होने वाली रजिस्ट्रेशन पर 1 प्रतिशत, 28 फरवरी 2026 तक रजिस्ट्रेशन पर 2 प्रतिशत और 31 मार्च 2026 तक रजिस्ट्रेशन पर 3 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी निर्धारित की गई है। इसके बाद सामान्य स्टांप ड्यूटी दरें लागू होंगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों द्वारा वसूली जाने वाली ट्रांसफर फीस पर भी एक स्पष्ट कानूनी सीमा निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि “यह कदम सुनिश्चित करता है कि ट्रांसफर या रजिस्ट्रेशन के समय सदस्यों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त मांग या मनमानी का सामना न करना पड़े।” इन सुधारों को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में बड़ी संख्या में संपत्तियां वर्षों से बिना रजिस्ट्रेशन के हैं, जिसके कारण परिवार स्पष्ट कानूनी स्वामित्व से वंचित हैं और विवादों व मुकदमेबाजी का सामना कर रहे हैं।
इस पहल के प्रभाव पर बात करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि ये सुधार नागरिकों को कानूनी रूप से सुरक्षित स्वामित्व, राज्य को स्टांप ड्यूटी की वैध वसूली, जबरदस्ती के बजाय प्रोत्साहन के माध्यम से रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने तथा सोसायटियों द्वारा अनुचित ट्रांसफर शुल्क से सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। सहकारिता विभाग ने पहले ही पंजाब भर के डिप्टी कमिश्नरों और सब-रजिस्ट्रारों को इन मानकों के सुचारु और समान कार्यान्वयन के लिए विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं।
इन सोसायटियों के निवासियों से अपील करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी पात्र निवासियों से इस सीमित समय के अवसर का लाभ उठाने, अपनी कन्वेयंस डीड रजिस्टर करवाने और अपने संपत्ति अधिकारों को सुरक्षित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, “यह पहल पूरे पंजाब में संपत्ति लेन-देन को कानूनी और पारदर्शी बनाते हुए आम नागरिक की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”






