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गंभीर संकट से पूर्ण उपचार की ओर कदम: भगवंत मान सरकार ने पंजाब में रेबीज़ के खतरे से निपटने के लिए किए व्यापक सुधार

चंडीगढ़, 13 जनवरी:
वर्षों से पंजाब में कुत्ते के काटने के परिणाम केवल एक घाव तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि इससे कहीं अधिक गंभीर होते थे। हर साल कुत्तों के काटने के लगभग तीन लाख मामले सामने आते थे, जिससे हजारों परिवारों पर रेबीज़ का खतरा बना रहता था। यदि समय पर इलाज न हो तो यह बीमारी 100 प्रतिशत घातक होती है, जबकि समय पर टीकाकरण से इसकी पूरी तरह रोकथाम संभव है। पहले एंटी-रेबीज़ वैक्सीनेशन (एआरवी) केवल 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ही उपलब्ध था, जिसके कारण पीड़ितों—जिनमें अक्सर बच्चे, बुजुर्ग और दिहाड़ी मजदूर शामिल होते थे—को अपने घरों से दूर जाना पड़ता था, घंटों इंतजार करना पड़ता था, मजदूरी का नुकसान होता था और कई मामलों में जरूरी पांच खुराकों वाले टीकाकरण कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ना पड़ता था। यह एक प्रणालीगत कमी थी और इससे बहुमूल्य मानव जीवन पर गंभीर खतरा बना रहता था।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में अब इस स्थिति को निर्णायक रूप से बदल दिया गया है। राज्य भर में पिछले तीन वर्षों के दौरान स्थापित किए गए 881 आम आदमी क्लीनिकों के व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाते हुए पंजाब सरकार ने प्राथमिक देखभाल स्तर पर एआरवी सेवाएं सुनिश्चित कर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा सुधार किया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा,
“मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी अगुवाई में पंजाब सरकार सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हर साल कुत्तों के काटने के लगभग तीन लाख मामले सामने आते हैं और 881 आम आदमी क्लीनिकों में एंटी-रेबीज़ टीकाकरण सेवाएं सुनिश्चित कर राज्य ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। लोगों को उनके घर के नजदीक समय पर और संपूर्ण इलाज उपलब्ध करवा कर हम एक सुरक्षित और स्वस्थ पंजाब का निर्माण कर रहे हैं।”
आम आदमी क्लीनिक, जहां पहले ही ओपीडी में 4.6 करोड़ से अधिक मरीज आ चुके हैं और जो प्रतिदिन लगभग 70,000 मरीजों को इलाज प्रदान करते हैं, पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बनकर उभरे हैं। इन सभी क्लीनिकों में एआरवी सेवाओं को एकीकृत करके मान सरकार ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि अब कुत्ते के काटने का मतलब घबराहट, खर्च या देरी नहीं रह गया है। अब यह इलाज घर के नजदीक, बिना लंबी कतारों और बिना किसी वित्तीय बोझ के उपलब्ध कराया जा रहा है तथा पांच खुराकों वाला पूरा टीकाकरण कोर्स नजदीकी क्लीनिक में निःशुल्क दिया जा रहा है।
पिछले चार महीनों में हर महीने औसतन 1,500 कुत्ते के काटने के पीड़ित आम आदमी क्लीनिकों में रिपोर्ट कर रहे हैं। खास बात यह है कि मरीज के क्लीनिक पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर इलाज शुरू कर दिया जाता है, जिससे रेबीज़ से होने वाली मौतों का खतरा काफी कम हुआ है। हजारों लोग अब पूरा टीकाकरण कार्यक्रम पूरा कर रहे हैं, जो पहले अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था में सुनिश्चित नहीं हो पाता था।
मरीजों के अनुभव में आया बदलाव भी बेहद महत्वपूर्ण है। पहले यह अनुभव तनावपूर्ण, खर्चीला और अनिश्चित होता था, जिसे अब एक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली में बदल दिया गया है। पीड़ितों को तुरंत देखभाल, सही परामर्श, व्यवस्थित फॉलो-अप और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी प्रदान की जा रही है। ग्रामीण परिवारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह बदलाव बिना किसी जोखिम के सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
संख्या और बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर, यह सुधार भगवंत मान सरकार की बेहतर प्रशासन देने की व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसके तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों का पूर्वानुमान, फ्रंटलाइन प्रणालियों को मजबूत करना और नीतियों में नागरिकों की गरिमा व सुविधा को प्राथमिकता देना शामिल है। पहले उपेक्षित रही इस आपात स्थिति को प्राथमिक रोकथाम देखभाल में बदलकर पंजाब सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्णायक नेतृत्व और मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था किस प्रकार बहुमूल्य जीवन बचा सकती है, असमानता को कम कर सकती है और राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।

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