
चंडीगढ़/नई दिल्ली, 17 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (आप) के संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को हमारी पूर्ण समर्थन है, लेकिन केंद्र सरकार की मंशा और समय पर गंभीर संदेह है। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया। साथ ही उन्होंने परिसीमन बिल का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यह पंजाब जैसे राज्यों के संघीय ढांचे को कमजोर कर उनकी प्रतिनिधित्व क्षमता को और घटा सकता है।
संसद में देर रात हुई बहस को संबोधित करते हुए सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि हम महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन इसके पीछे केंद्र सरकार की मंशा गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके और समय पर यह बिल लाया गया है, उससे साफ है कि इसे महिला सशक्तिकरण की ठोस पहल के बजाय राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
‘आप’ सांसद ने आगे कहा कि यदि केंद्र सरकार की नीयत साफ होती तो वह इस बिल को 2023 में ही पास कर सकती थी। उस समय यह कहा गया था कि बिल जनगणना के बाद लाया जाएगा, लेकिन अब भी इसे ऐसे समय लाया गया है जब जनगणना की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई, जो केंद्र की संदिग्ध नीति को दर्शाता है।
परिसीमन बिल का कड़ा विरोध करते हुए गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि यह राज्यों के राजनीतिक संतुलन पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इससे पंजाब जैसे छोटे राज्यों की प्रतिनिधित्व क्षमता और कम हो जाएगी, जबकि अधिक आबादी वाले राज्यों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा। इससे छोटे और बड़े राज्यों के बीच असमानता और गहरी होगी।
उन्होंने पंजाब से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आजादी से पहले और बाद में पंजाब से किए गए कई वादे अभी तक अधूरे हैं। पंजाब को विशेष दर्जा देने के बजाय राज्य के फंड रोके जा रहे हैं और बीबीएमबी पर भी पंजाब के अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम प्रतिनिधित्व के कारण पंजाब पहले ही उपेक्षा झेल रहा है और यह परिसीमन स्थिति को और खराब कर देगा।
अन्य देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में सभी राज्यों को समान अधिकार प्राप्त हैं। भारत को भी ऐसे ढांचे की ओर बढ़ना चाहिए जहां आबादी से परे हर राज्य के साथ निष्पक्षता और समानता का व्यवहार हो।
पंजाबी प्रवासियों से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए गुरमीत सिंह मीत हेयर ने नीति सुधारों की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रवासी पंजाबियों ने देश और पंजाब के विकास में बड़ा योगदान दिया है और अब समय आ गया है कि सरकार उनकी भूमिका को मान्यता देते हुए भारत से उनके संबंध मजबूत करने के लिए दोहरी नागरिकता देने पर गंभीरता से विचार करे।









