
चंडीगढ़, 1 मई—
पंजाब विधानसभा ने आज “सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन (पंजाब संशोधन) बिल, 2026” पारित कर दिया। यह बिल कैबिनेट मंत्री संजेव अरोड़ा द्वारा सदन में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्य में कार्यरत सोसाइटियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुचारू संचालन को मजबूत करना है।
मंत्री ने बताया कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार ने 1860 के ऐतिहासिक सोसाइटीज एक्ट में संशोधन करते हुए यह नया कानून प्रस्तुत किया है। यह संशोधन विशेष रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और समाज कल्याण क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं के नियामक ढांचे को आधुनिक बनाएगा।
उन्होंने बताया कि अब पंजाब की सभी पंजीकृत सोसाइटियां सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में आएंगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनविश्वास बढ़ेगा। रजिस्ट्रार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह किसी भी सोसाइटी से जानकारी या रिकॉर्ड मांग सके, ताकि फंड के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके।
बिल के तहत सभी सोसाइटियों को हर पांच साल बाद अपनी रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, संशोधित कानून लागू होने के एक वर्ष के भीतर सभी मौजूदा सोसाइटियों को पुनः पंजीकरण कराना होगा, ताकि वे नए नियमों के अनुरूप आ सकें।
मंत्री ने कहा कि समान या मिलते-जुलते नाम वाली सोसाइटियों को पंजीकृत नहीं किया जाएगा, ताकि जनता में भ्रम न फैले। इसके अलावा, बिना रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति के कोई भी सोसाइटी अपनी अचल संपत्ति को बेच, हस्तांतरित या निपटान नहीं कर सकेगी।
उन्होंने बताया कि सोसाइटियों की निगरानी संबंधित क्षेत्रों के डिप्टी कमिश्नरों द्वारा की जाएगी। शिकायत मिलने पर जांच के आदेश दिए जा सकेंगे और गड़बड़ी पाए जाने पर एसडीएम स्तर के प्रशासक की नियुक्ति कर व्यवस्था बहाल की जाएगी।
इसके अलावा, यदि किसी सोसाइटी की प्रबंधक समिति भंग होती है, तो छह महीने के भीतर नए चुनाव करवाना अनिवार्य होगा, जिससे लोकतांत्रिक ढांचा कायम रहे।
मंत्री ने कहा कि कई चैरिटेबल संस्थाएं सोसाइटी के रूप में पंजीकृत होकर आयकर लाभ लेती हैं। यह कानून सुनिश्चित करेगा कि वे सख्त नियमों और जवाबदेही के साथ ही इन लाभों को जारी रखें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संशोधन स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं की निगरानी को मजबूत करेगा और सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह कानून राज्य में पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा।









