13 साल में 12 परीक्षाएं पास कीं: अभय तिवारी की ‘सफलता’ ने झारखंड के जेपीएससी घोटाले की शुरुआत

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले ने अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की गिरफ्तारी के साथ एक नया मोड़ ले लिया है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उससे पूछताछ में उम्मीदवारों, परीक्षा ऑपरेटरों और आयोग से जुड़े लोगों के एक कथित नेटवर्क का पता चला है।
तिवारी को आपराधिक जांच विभाग ने 22 जुलाई को गोड्डा जिले के पोरेयाहाट से गिरफ्तार किया था। इससे पहले उन्होंने पोरेयाहाट में ब्लॉक आपूर्ति अधिकारी के रूप में कार्य किया था। सरकारी सेवा में प्रवेश करने से पहले, वह टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, या टीडीपीएल से जुड़े थे, जो लखनऊ स्थित एक कंपनी है, जिसने झारखंड में कई जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं का संचालन किया है। इस फर्म को खुद उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी ब्लैकलिस्ट किया गया है।
परीक्षा के उम्मीदवार के रूप में तिवारी का अपना रिकॉर्ड विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है। सीआईडी की जांच के अनुसार, उसने लगभग 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाओं को पास किया। इस सूची में झारखंड की पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षा, भारतीय नौसेना भर्ती, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परीक्षा, सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल भर्ती, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड भर्ती, जेएसएससी पीजीटी और सीजीएल परीक्षाएं और जेपीएससी एसीएफ, एफआरओ, एफएसओ और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं शामिल हैं।








