आजमगढ़ में खौफनाक वारदात के बाद सबसे दर्दनाक मंजर, एक साथ जलीं तीन चिताएं, भतीजी ने दी चाचा-चाची और भाई को अंतिम विदाई

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर सामने आई है जिसने हर किसी को इमोशनल कर दिया. आजमगढ़ में 22 सितंबर की शाम एक परिवार में हुई 3 लोगों की मौत के बाद जब पति, पत्नी और बच्चे की अर्थी एक साथ श्मशान घाट पहुंची तो सन्नाटा चीखों में बदल गया. जिस घर में कल तक अपनों की हंसी-खुशी गूंजती थी आज उसी घर के तीन लोगों की मौत हो चुकी थी. लेकिन इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों को मुखाग्नि देने के लिए परिवार में एक भी पुरुष सदस्य जीवित नहीं बचा था. आखिरकार मृतक की भतीजी कुमारी वर्षा को हिम्मत जुटाकर आगे आना पड़ा और उसने अपने ही चाचा-चाची और चचेरे भाई को एक साथ मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी.
श्मशान घाट पर सन्नाटा
राजघाट शवदाह गृह पर जब तीन शव एक साथ चिता पर सजाए गए तो वहां का माहौल ऐसा था जिसे शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं. हर तरफ सिसकियां और आंसू थे. जिस परिवार की कहानी का अंत इतनी खौफनाक त्रासदी के साथ हुआ उसे देखने के लिए पूरा इलाका उमड़ पड़ा था.
2018 के कत्ल से शुरू हुआ था बर्बादी का सिलसिला
आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस परिवार में अंतिम संस्कार के लिए भी कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा? दरअसल मृतक अरविंद सिंह के बड़े भाई सुनील की साल 2018 में ही हत्या हो चुकी थी. सुनील की आत्मा की शांति के लिए परिवार में पूजा का आयोजन किया गया था. बताया जा रहा है कि अरविंद इस पूजा के खिलाफ था. इस दौरान उसकी पूजा कर रहे पंडितों से भी बहस हुई थी. तभी सनकी अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की बेरहमी से हत्या कर दी. इसके बाद उसने अपने ही बच्चों को घर के अंदर बंधक बना लिया. पुलिस को सूचना मिलने के बाद कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला. पुलिस लगातार आरोपी की मान-मनौवल करती रही. लेकिन वह बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था.
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