मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की बैठक असहमति के साये में हुई, कहा- सभी एसआईआर के फैसले सर्वसम्मति से

राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आंतरिक विभाजन की खबरों को लेकर मचे बवाल के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को यहां बैठक की और कहा कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग ने नए मतदाता नामांकन के लिए फॉर्म 6 का भी बचाव करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वैधता को बरकरार रखा है।
चुनाव आयोग ने कहा कि गैर-एसआईआर अवधि के लिए, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का उपयोग जारी रहेगा।
मीडिया में खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी की इस पहली बैठक में, पूर्ण आयोग ने एसआईआर के तहत मतदाता पंजीकरण को आसान बनाने के लिए कई उपाय भी जारी किए, और नागरिकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईएनईटी की अधिक निगरानी के लिए तंत्र का आश्वासन दिया, जो “सख्त केंद्रीय नियंत्रण” के लिए भी जांच के दायरे में है।
यह स्वीकार करते हुए कि फील्ड अधिकारियों के पास उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार ईसीआईएनईटी प्रणाली तक भूमिका-आधारित पहुंच है, चुनाव आयोग ने कहा कि एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति और आईआईटी या आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करते हुए प्रासंगिक अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ईसीआईएनईटी की समीक्षा करेगी और आयोग को एक रिपोर्ट सौंपेगी।
चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत दिल्ली में 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक आपत्तियां और दावे दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है।
नोटिसों और दावों एवं आपत्तियों के निस्तारण की अवधि दिल्ली में 30 नवंबर और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने कहा कि बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) उन मतदाताओं से दस्तावेजों का संग्रह सुनिश्चित करेंगे, जिन्हें चल रहे एसआईआर के दौरान अनमैप किए गए रिकॉर्ड या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस प्राप्त हुए थे। बयान में कहा गया है, ‘बीएलओ दस्तावेज एकत्र करने के लिए ऐसे व्यक्तियों के घरों का दौरा करेंगे और उसके बाद उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा निर्णय के लिए ईसीआईएनईटी को अपलोड करेंगे। ऐसे व्यक्तियों को सुनवाई के लिए ईआरओ/एआरओ कार्यालय में बुलाने की आवश्यकता नहीं है। केवल असाधारण परिस्थितियों में, जैसा कि ईआरओ द्वारा तय किया गया है, सुनवाई अधिमानतः ऑनलाइन होगी।
इसमें कहा गया है कि एक मतदाता परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में भाग लेने के लिए अधिकृत कर सकता है।
चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे जाने के विवादास्पद मुद्दे पर चुनाव आयोग ने आज स्पष्ट किया कि पत्र (मीडिया रिपोर्ट में उल्लिखित) आयोग या आईटी डिवीजन के किसी भी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं था।
उन्होंने कहा, ‘यह चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर एक अधिकारी के काम से संबंधित था. संबंधित अधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्य पुनर्वितरण आदेशों को वास्तव में दो आयुक्तों के आदेशों के बाद लागू नहीं किया गया था, और उप चुनाव आयुक्त द्वारा आईटी डिवीजन पर निगरानी को कभी वापस नहीं लिया गया था।
मीडिया में आई खबरों में दावा किया गया था कि संधू और जोशी ने चुनाव आयोग के भीतर कार्य आवंटन आदेश जारी करने के बाद कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखा था, जिसमें नाम जोड़ने या हटाने के लिए केंद्रीय रूप से चुनाव आयोग में अधिकार केंद्रित करने की धमकी दी गई थी।
इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संधू और जोशी ने एसआईआर पर 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई और कहा कि ये उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।









