उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी में कब होगा पंचायत चुनाव? ओपी राजभर ने कहा- पिछड़ा वर्ग आयोग रिपोर्ट दे, हम चुनाव कराने को तैयार

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा राज्य में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने के आदेश के बाद सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है. इस बीच यूपी सरकार के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने हमारे सहयोगी चैनल ‘आजतक’ से खास बातचीत में साफ किया है कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है. लेकिन यह पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश पर गठित ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे बढ़ेगी.

पंचायत चुनाव और पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार चुनाव कराने से पीछे नहीं हट रही है और इसके लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव पिछड़ों के आरक्षण और अन्य प्रावधानों से जुड़े हैं जो पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बगैर संभव नहीं हैं. हाईकोर्ट ने आयोग को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. अब यह आयोग को तय करना है कि वह तय समय में रिपोर्ट दे पाता है या नहीं जिसका जवाब उसे अदालत में देना होगा.

राहुल गांधी और सपा पर तीखा हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के रिश्तों पर निशाना साधते हुए राजभर ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बयान का समर्थन किया. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी में वास्तव में हैसियत है, तो वे बिना समाजवादी पार्टी के समर्थन के अमेठी से चुनाव लड़कर दिखा दें. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी अमेठी और रायबरेली से केवल तभी जीत दर्ज कर पाते हैं जब उन्हें सपा का साथ मिलता है, उनका अपना व्यक्तिगत जनाधार वहा कुछ नहीं है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और आंदोलनों की फंडिंग पर सवाल

विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए राजभर ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद एक संवैधानिक पद होता है, जिसे किसी भी आंदोलन के दबाव में नहीं हटाया जा सकता. इसे हटाने के लिए संविधान में महाभियोग की प्रक्रिया तय है. उन्होंने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनावों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और कहा कि विपक्ष झूठे आरोप लगाकर देश की जनता को गुमराह कर रहा है.

इसके साथ ही दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तंज कसा कि वहां प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने और रहने का खर्च कौन उठा रहा है, क्योंकि सामान्य व्यक्ति के लिए भी दिल्ली आना-जाना महंगा पड़ता है, इसलिए इस फंडिंग की जांच होनी चाहिए.

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