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राम मंदिर की एसआईटी को मिली चोरी के 105 मामले 25 सितंबर तक चार्जशीट

अयोध्या राम मंदिर में चंदे के कथित गबन की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह 25 सितंबर तक अपना पहला आरोपपत्र दायर करेगा। एसआईटी ने अपनी जांच में चंदे की कथित चोरी के 105 मामलों का खुलासा किया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा, ”दो दिन के भीतर हम आरोपपत्र दाखिल करेंगे।

मेहता ने पीठ से कहा, ”पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन 25 सितंबर को खत्म होने जा रहे हैं, इसलिए हमें आरोपपत्र दाखिल करना होगा, अन्यथा उन्हें (आरोपियों को) डिफ़ॉल्ट जमानत मिल जाएगी।

सीआरपीसी की धारा 167 (2) को बदलने वाली नई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत, एक आरोपी वैधानिक जमानत का हकदार हो जाता है यदि जांच एजेंसी 60 या 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दायर करने में विफल रहती है, जैसा कि मामला हो।

पीठ ने सीलबंद लिफाफे में एसआईटी द्वारा सौंपी गई विस्तृत स्थिति रिपोर्ट का भी अवलोकन किया।

एसआईटी को कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और दान रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद कथित चोरी के 105 मामले मिले हैं। इसने दान की चोरी को फिर से बनाने के लिए सैकड़ों घंटे के निगरानी वीडियो फुटेज, लेनदेन लॉग और बैंक जमा रिकॉर्ड का विश्लेषण किया।

शीर्ष अदालत के आदेश पर 26 जुलाई को गठित दूसरी एसआईटी में लखनऊ जोन की आईजीपी किरण एस, अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा, अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर और बाराबंकी के एडिशनल एसपी रितेश कुमार सिंह शामिल हैं।

इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित पहली एसआईटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में दान चोरी के 70 से अधिक मामलों को दर्ज किया था।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले एसआईटी से कहा था कि वह अपनी जांच तेजी से पूरी करे, इसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाए और उसे सीलबंद लिफाफे में जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच दल में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने के लिए भी कहा था।

‘उपचारात्मक कार्रवाई’ की जरूरत पर जोर देते हुए पीठ ने कहा था कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

शीर्ष अदालत में राजद सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता एनके गोस्वामी, अजय कुमार राय और हिंदू धर्म परिषद द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार किया गया है, जिसमें अयोध्या में राम मंदिर के दान के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट की सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है।

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