क्यों है भगवान शिव का प्रिय महीना श्रावण? समुद्र मंथन से जुड़ी कथा और कावड़ का महत्व

आज से श्रावण मास आरंभ हो गया है।शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकला विष पीने से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ा और उनका पूरा शरीर गर्म हो गया था। देवताओं ने उन्हें ठंडा रखने के लिए लगातार जल अर्पित किया। तभी से माना जाता है कि जल चढ़ाने से शिव जी का क्रोध शांत होता है और वो जल्दी प्रसन्न होते हैं।
मान्यता है कि श्रावण में ही माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। इस महीने में की गई पूजा का फल 100 गुना मिलता है। इसीलिए इसे “शिव का प्रिय मास” कहा जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पापों का नाश होता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण के सोमवार को जल, बेलपत्र व दूध चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है। कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए और विवाहित लोग सुखी दांपत्य के लिए ये व्रत करते हैं।
यमुनानगर के सरोजिनी कालोनी स्थित दयालु जी मंदिर में सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका है। श्रद्धालु विधिवत रूप से शिव की पूजा अर्चना करके शिवलिंग पर जल अभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं, उनकी पूजा अर्चना करने से सभी संकट दूर होते हैं सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।









