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किसान की बेटी प्रिया रानी ने छोड़ी लाखों की कॉरपोरेट नौकरी, 4 प्रयासों में बनीं IAS; अब सासाराम में एक्शन की चर्चा

पिता किसान, मां गृहिणी और बेटी का सपना देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शामिल होना। बिहार की प्रिया रानी ने इंजीनियरिंग के बाद कॉरपोरेट नौकरी छोड़ी, असफलताओं का सामना किया और आखिरकार UPSC में 69वीं रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बनीं। आज सासाराम की SDM के तौर पर उनके काम करने के अंदाज की चर्चा हो रही है।

बिहार के एक किसान परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाली प्रिया रानी की कहानी मेहनत, धैर्य और बड़े लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास करने की मिसाल है।

उनके पिता खेती-किसानी से जुड़े हैं और मां गृहिणी हैं। ऐसे पारिवारिक माहौल से निकलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और सिविल सेवा में जाने का सपना देखा।

आज प्रिया रानी सासाराम की एसडीएम के रूप में अपनी सक्रिय कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। कभी सरकारी व्यवस्थाओं का निरीक्षण तो कभी सड़क पर उतरकर हालात का जायजा लेने की उनकी तस्वीरें सामने आती रहती हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।

पिता किसान, बेटी ने चुनी IAS बनने की कठिन राह

प्रिया रानी बिहार के पटना क्षेत्र के कुरकुरी गांव से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और मां गृहिणी। परिवार ने उनकी पढ़ाई में सहयोग किया, जिसके दम पर उन्होंने गांव से निकलकर उच्च शिक्षा हासिल की।

प्रिया ने रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके पास कॉरपोरेट सेक्टर में करियर बनाने का विकल्प था। उन्होंने बेंगलुरु की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी शुरू कर दी।

अच्छी नौकरी छोड़ दिल्ली पहुंचीं, मन में था बड़ा सपना

बेंगलुरु में नौकरी करने के बावजूद प्रिया रानी का लक्ष्य सिविल सेवा में जाना था। उन्होंने सुरक्षित करियर के रास्ते से हटकर UPSC की तैयारी करने का फैसला लिया। साल 2019 में वह नौकरी छोड़कर दिल्ली पहुंचीं और परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।

यह फैसला उनके लिए एक बड़ा मोड़ था। UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता निश्चित नहीं होती, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी।

तैयारी के दौरान उन्होंने अखबार पढ़ने, करेंट अफेयर्स समझने और परीक्षा की जरूरतों के मुताबिक अपनी रणनीति बनाने पर ध्यान दिया।

पहली असफलता ने रोका नहीं, हर प्रयास से सीखा नया सबक

प्रिया रानी को पहले प्रयास में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वह शुरुआती कोशिश में मुख्य परीक्षा तक भी नहीं पहुंच पाईं। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी का विश्लेषण किया और कमजोर विषयों पर काम करना शुरू किया।

उन्होंने उत्तर लेखन, नोट्स बनाने और वैकल्पिक विषय इकोनॉमिक्स की तैयारी पर ध्यान दिया। लगातार प्रयासों के दौरान उन्हें यह समझ आया कि सिर्फ लंबे समय तक पढ़ना ही नहीं, बल्कि सही रणनीति अपनाना भी जरूरी है।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता, फिर भी IAS बनने की चाह बरकरार

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में प्रिया रानी ने ऑल इंडिया रैंक 284 हासिल की। इस सफलता के आधार पर उनका चयन इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस (IDES) में हुआ।

यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन IAS बनने का सपना अभी पूरा नहीं हुआ था। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अगले प्रयास में बेहतर रैंक हासिल करने की दिशा में मेहनत की। तीसरे प्रयास में भी मनचाहा परिणाम नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।

चौथे प्रयास में पलटी बाजी, UPSC में मिली 69वीं रैंक

लगातार कोशिशों के बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में प्रिया रानी ने ऑल इंडिया रैंक 69 हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उनका IAS बनने का सपना पूरा हुआ और वह 2024 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं।

उनकी सफलता की कहानी बताती है कि शुरुआती असफलताएं किसी लक्ष्य का अंतिम फैसला नहीं होतीं। दूसरे प्रयास में IDES में चयन और फिर चौथे प्रयास में IAS बनना उनके लंबे संघर्ष के अहम पड़ाव रहे।

इंटरव्यू में भी किया अच्छा प्रदर्शन

उपलब्ध परीक्षा रिकॉर्ड के अनुसार प्रिया रानी को लिखित परीक्षा में 807 अंक और व्यक्तित्व परीक्षण यानी इंटरव्यू में 193 अंक मिले। कुल 1000 अंकों के साथ उन्होंने 69वीं रैंक हासिल की। उनका वैकल्पिक विषय इकोनॉमिक्स था।

इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनकी तैयारी के साथ-साथ IDES अधिकारी के रूप में मिला अनुभव भी अहम रहा। लोगों से बातचीत करने और परिस्थितियों को समझने के अनुभव ने उन्हें प्रशासनिक भूमिका के लिए उपयोगी सीख दी।

अब सासाराम में अपने काम के अंदाज से चर्चा में

IAS बनने के बाद प्रिया रानी की पहचान अब उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भी जुड़ रही है। सासाराम में एसडीएम के रूप में वह सरकारी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करती और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों का जायजा लेती दिखाई देती हैं।

उनकी सक्रियता से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रहे हैं। हालांकि, उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वह सफर है, जिसमें किसान पिता के परिवार से निकली बेटी ने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर अपने दम पर UPSC में सफलता हासिल की।

प्रिया रानी की यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिवार का सहयोग, स्पष्ट लक्ष्य और असफलताओं से सीखने की क्षमता किसी भी बड़े सपने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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