बिहारराज्य

बाढ़ पीड़ितों के आंकड़ों में भारी अंतर पर भड़के नगर व‍िकास मंत्री; बोले- कागजों तक सीमित न रहे आकलन, राहत सबको मिले

Bhagalpur Flood GR Portal Data Mismatch: भागलपुर जिले में बाढ़ पीड़ितों के राहत और अनुग्रह (जीआर) राशि वितरण से जुड़े सरकारी आंकड़ों में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। जिला आपदा प्रबंधन शाखा की रिपोर्ट और राज्य सरकार के आधिकारिक जीआर पोर्टल पर दर्ज बाढ़ प्रभावित परिवारों की संख्या में करीब 50 हजार से अधिक का भारी अंतर देखा जा रहा है।

इस गंभीर विसंगति पर संज्ञान लेते हुए जिले के प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने दो टूक कहा है कि बाढ़ प्रभावितों का आकलन केवल सरकारी कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका सटीक व पारदर्शी जमीनी सत्यापन होना अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस अंतर को तुरंत दूर कर छूटे हुए सभी वास्तविक पीड़ितों का नाम पोर्टल पर दर्ज कराया जाएगा, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहे।

दरअसल, भागलपुर में प्रतिवर्ष आने वाली भीषण बाढ़ और कटाव के बीच चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों का प्रत्यक्ष फीडबैक लेने के उद्देश्य से प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने रविवार शाम स्थानीय परिसदन (अतिथि गृह) में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद बैठक की। बैठक के दौरान पत्रकारों ने स्वीकार किया कि इस बार जिला प्रशासन बाढ़ राहत शिविरों, नावों के परिचालन, मेडिकल कैंप और सूखा राशन वितरण को लेकर धरातल पर काफी सक्रिय रहा और व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत बेहतर रहीं।

आपदा शाखा में दो लाख से अधिक, पोर्टल पर डेढ़ लाख से भी कम

संवाद के दौरान दैनिक जागरण ने आधिकारिक आंकड़ों के इस गंभीर अंतर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। मंत्री के संज्ञान में लाया गया कि जहां एक ओर जिला आपदा प्रबंधन शाखा बाढ़ प्रभावित परिवारों की संख्या दो लाख से अधिक बता रही है, वहीं दूसरी ओर अनुग्रह राशि भेजने वाले जीआर पोर्टल पर यह संख्या डेढ़ लाख से भी कम दर्ज है।

सवाल यह उठाया गया कि जब पोर्टल पर 50 हजार से अधिक परिवारों का नाम ही दर्ज नहीं है, तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए मिलने वाली सात हजार रुपये की अनुग्रह राशि उनके बैंक खातों में कैसे पहुंचेगी?

  • आपदा प्रबंधन शाखा और जीआर (GR) पोर्टल पर दर्ज बाढ़ पीड़ितों की संख्या में 50 हजार से अधिक का अंतर; प्रभारी मंत्री ने माना बेहद गंभीर विषय

  • दैनिक जागरण के सवाल पर बोले प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा— बाढ़ पीड़ितों का धरातल पर हो सही आकलन, केवल कागजों तक सीमित न रहे आंकड़ा

  • अतिथि गृह में मीडियाकर्मियों से बाढ़ प्रबंधन का लिया फीडबैक; छूटे हुए सभी पात्र प्रभावित परिवारों को पोर्टल पर जोड़ने का दिया स्पष्ट भरोसा

  • पत्रकारों ने उठाई मांग— तात्कालिक राहत तक सीमित न रहे व्यवस्था, गंगा व कोसी के कटाव और विस्थापन का निकाला जाए स्थायी समाधान

इस तकनीकी और प्रशासनिक खामी को प्रभारी मंत्री ने अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते हुए आश्वस्त किया कि पोर्टल पर नाम छूटने की आशंका वाले सभी परिवारों का त्वरित सत्यापन कराया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा हर पीड़ित तक राहत पहुंचाने की है और किसी भी सूरत में पात्र परिवार अनुग्रह राशि से छूटने नहीं चाहिए।

तात्कालिक राहत नहीं, स्थायी समाधान की दरकार

बैठक में मीडियाकर्मियों ने जिले की अन्य बुनियादी समस्याओं और बाढ़ के स्थायी निदान का मुद्दा भी रखा। पत्रकारों ने रेखांकित किया कि गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण हर साल जिले की लाखों की आबादी बेघर होती है।

प्रशासन को केवल पॉलिथीन शीट और तात्कालिक खाद्यान्न वितरण तक सीमित रहने के बजाय जल निकासी, तटबंधों के सुदृढ़ीकरण और कटाव निरोधी कार्यों का एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए। प्रभारी मंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से दर्ज करते हुए संबंधित विभागों के माध्यम से ठोस नीतिगत कदम उठाने का आश्वासन दिया।

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