राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को पंजाब के नांगल में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता विकास प्रभाकर की हत्या से कथित तौर पर जुड़े एक प्रमुख व्यक्ति को गिरफ्तार किया। आरोपी हरविंदर कुमार उर्फ सोनू संयुक्त अरब अमीरात में रहता था और कहा जाता है कि उसने अपराधियों को रसद सहायता और वित्तपोषण प्रदान किया था। उसे एनआईए ने वांछित घोषित कर दिया था। एनआईए ने एक बयान में कहा कि कुमार को कूटनीतिक प्रयासों के बाद गुरुवार को भारत प्रत्यर्पित किया गया। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद कुमार को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया था। उसे कानूनी कार्यवाही के लिए यहां विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया। यह मामला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के सदस्यों द्वारा प्रभाकर की लक्षित हत्या से संबंधित है। एनआईए ने हत्या के संबंध में 9 मई, 2024 को एक मामला दर्ज किया था। इस मामले में अब तक तीन चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। नवीनतम गिरफ्तारी 13 अगस्त को यूएई के एक अन्य आरोपी मनवीर राम को पकड़ने के बाद की गई है। अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों की आपूर्ति में कथित तौर पर शामिल मनवीर राम को अमृतसर हवाई अड्डे पर रोका गया। एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि प्रभाकर को खत्म करने की साजिश कथित तौर पर जर्मनी स्थित बीकेआई के गुर्गों हरजीत सिंह उर्फ लाडी और कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू ने रची थी। बयान में कहा गया है कि जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि कुमार ने संयुक्त अरब अमीरात से काम करते हुए विदेशों में स्थित बीकेआई के गुर्गों के लिए एक रसद प्रदाता और फाइनेंसर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसमें कहा गया है कि वह एक भर्तीकर्ता और हैंडलर के रूप में काम करता था, हथियारों की व्यवस्था करता था और प्रभाकर की हत्या में शामिल शूटरों को उनकी डिलीवरी की सुविधा प्रदान करता था। आतंकवाद निरोधक एजेंसी ने कहा कि हरजीत सिंह और कुलबीर सिंह के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए कुमार ने साजिश के संबंध में आतंकवाद के लिए धन भी प्राप्त किया और उसे हस्तांतरित किया। एजेंसी ने कहा कि कुमार का प्रत्यर्पण भगोड़ों की भारत वापसी में शामिल विभिन्न एजेंसियों के प्रयासों के कारण किया गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और मांग पूरी नहीं होने पर अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
मुंबई प्रेस क्लब में बातचीत में दीपके ने कहा कि सीजेपी सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को शहर के दादर इलाके के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक कुमार चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख के पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में विरोध प्रदर्शन होंगे। अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
दीपके ने यह भी मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए और इसमें नागरिक समाज की भागीदारी होनी चाहिए।
उन्होंने 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसमें आगे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना की है और उनके इस्तीफे की मांग की है, क्योंकि यह पता चला है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं, जिनमें से कुछ को उनकी जानकारी के बिना जारी किया गया था।
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में स्पष्ट किया है कि तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति से निर्णय लिए, जिनमें मतदाता सूची के एसआईआर से संबंधित निर्णय भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (यूबीटी) 4 अक्टूबर को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा निकालेंगे।









