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शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, लाखों रुपये के बिल वाले मरीज अब बिना कोई भुगतान किए अस्पताल से इलाज करवाकर अपने घर लौट रहे हैं।

चंडीगढ़, 22 अप्रैल 2026:

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब का स्वास्थ्य क्षेत्र एक क्रांतिकारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पंजाब सरकार के वादे के अनुसार हर परिवार को सुलभ, किफायती और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। कई वर्षों से ऊंचे इलाज खर्चों के कारण मरीज इलाज में देरी करने को मजबूर होते रहे, मेडिकल टेस्ट टालते रहे या दवाइयां बीच में ही छोड़ देते थे, जिससे परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते थे और स्वास्थ्य परिणाम भी प्रभावित होते थे। यह स्थिति, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक थी, अब धीरे-धीरे बदल रही है।

इस बदलाव के केंद्र में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना है, जो भगवंत मान सरकार की प्रमुख पहल है और तेजी से लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ा रही है। केवल तीन महीनों में 40 लाख से अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कवर देते हैं। इस योजना को बड़े स्तर पर अपनाए जाने से इसकी जरूरत और इस पर लोगों के भरोसे का पता चलता है। 21 अप्रैल को 28,766 पंजीकरण हुए, जो संकेत देते हैं कि स्वास्थ्य प्रणाली अब अधिक जवाबदेह, समावेशी और जन-केंद्रित बन रही है।

जिलों में इस योजना का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। लुधियाना 4.20 लाख कार्डों के साथ सबसे आगे है, इसके बाद पटियाला (3.82 लाख) और जालंधर (2.85 लाख) हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना की पहुंच केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। होशियारपुर, अमृतसर, मानसा, फाजिल्का और बरनाला जैसे टियर-2 और टियर-3 जिलों में भी इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि सरकार की यह स्वास्थ्य पहल छोटे कस्बों तक तेजी से पहुंच रही है, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत थी।

इस बदलाव की सबसे बड़ी पुष्टि जमीनी स्तर पर दिखाई दे रही है। सब-डिविजनल अस्पताल खन्ना के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनिंदर सिंह भसीन कहते हैं, “स्वास्थ्य सेवा किसी विशेषाधिकार की तरह नहीं होनी चाहिए। पहले कवरेज सीमित थी, लेकिन अब हर निवासी को शामिल किया गया है।”

वे आगे बताते हैं, “हालिया महीनों में हमने 200 से अधिक गॉलब्लैडर (पित्ताशय) सर्जरी की हैं। आमतौर पर इसकी लागत 40,000 से 80,000 रुपये होती है, लेकिन मरीजों को इस योजना के तहत कोई भुगतान नहीं करना पड़ा।”

उन्होंने कहा, “घुटने और कूल्हे की रिप्लेसमेंट, जिनकी लागत 1 लाख रुपये से अधिक है, अब रोजमर्रा के आधार पर मुफ्त हो रही हैं। हम हर दिन लगभग 10 सर्जरी करते हैं, वह भी पूरी तरह कैशलेस।”

आपातकालीन देखभाल के बारे में डॉ. भसीन बताते हैं, “एस-टी एलिवेशन मायोकार्डियल इंफार्क्शन (STEMI) हार्ट अटैक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। टेनेक्टेप्लेस नामक थ्रोम्बोलाइटिक दवा, जो हार्ट अटैक के दौरान खून के थक्कों को तेजी से घोलने के लिए इस्तेमाल होती है, की मदद से हम रक्त प्रवाह जल्दी बहाल करते हैं और अब तक करीब 100 मरीजों की जान बचा चुके हैं।”

बरनाला के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करण चोपड़ा भी इसी तरह के बदलाव की पुष्टि करते हुए कहते हैं, “पहले मरीज महीनों तक सर्जरी टालते थे और अब वे तुरंत इलाज के लिए आ रहे हैं। हर सर्जरी पर लोगों को 1 से 1.5 लाख रुपये की बचत हो रही है।”

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस योजना के उद्देश्य पर कहा कि स्वास्थ्य सेवा मरीज की भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कवर मिल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि बिना किसी आर्थिक बोझ के हर घर-परिवार तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचे।

भगवंत मान सरकार केवल स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार नहीं कर रही, बल्कि नागरिकों और व्यवस्था के बीच संबंधों को भी नए सिरे से परिभाषित कर रही है। आर्थिक बाधाओं को दूर करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज से जुड़े फैसले खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर लिए जाएं। पंजाब भर के डॉक्टरों का कहना है कि सबसे बड़ा बदलाव मनोवैज्ञानिक स्तर पर है—डर में स्पष्ट कमी आई है और अब परिवार हालात बिगड़ने तक इंतजार करने की बजाय बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

यह वह प्रशासन है जो सीधे लोगों के जीवन में बड़े और सुधारात्मक बदलाव ला रहा है। यह वह सुधार है जो सम्मान को पुनः स्थापित करता है, और यह भगवंत मान सरकार है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक अधिकार के रूप में सुनिश्चित कर रही है।

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