भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार आरबीआई को निजी खजाने की तरह इस्तेमाल कर रही है, जबकि राज्यों को उनके हिस्से से वंचित रखा जा रहा है : Harpal Singh Cheema

चंडीगढ़, 23 मई: Harpal Singh Cheema ने शनिवार को Reserve Bank of India द्वारा केंद्र सरकार को लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि हस्तांतरित किए जाने के मुद्दे पर भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Reserve Bank of India को एक निजी खजाने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि राज्यों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आरबीआई से लगभग 14.29 लाख करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं, जिनमें से आधे से अधिक फंड केवल पिछले तीन वर्षों में हस्तांतरित किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आरबीआई के भंडार से लगातार निकासी न केवल देश के केंद्रीय बैंक और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को कमजोर करती है, बल्कि राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर कर सहकारी संघवाद की भावना को भी ठेस पहुंचाती है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई का यह सरप्लस सभी राज्यों में होने वाली आर्थिक गतिविधियों, लेन-देन और राजस्व संग्रह से उत्पन्न होता है, इसलिए केंद्र सरकार को पूरी राशि अपने पास रखने के बजाय राज्यों को भी उनका उचित हिस्सा देना चाहिए।
एक वीडियो बयान में Harpal Singh Cheema ने कहा कि देश की वित्तीय व्यवस्था संघवाद के सिद्धांत पर आधारित है। हर भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है और हर राज्य राष्ट्रीय विकास तथा राजस्व सृजन में अपनी भूमिका निभाता है। फिर ऐसे असाधारण लाभों में राज्यों को उनका हिस्सा क्यों नहीं दिया जा रहा?
आरबीआई ट्रांसफर में भारी वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आरबीआई ने 2023-24 में 2.10 लाख करोड़ रुपये, 2024-25 में 2.68 लाख करोड़ रुपये और अब 2025-26 में लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये केंद्र को हस्तांतरित किए हैं। उन्होंने कहा कि केवल पिछले तीन वर्षों में हुए ट्रांसफर, 2014 के बाद हुए कुल हस्तांतरण का 53 प्रतिशत से अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि इस स्तर और बार-बार फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया अभूतपूर्व है। पहले इस प्रकार की असाधारण निकासी केवल विशेष परिस्थितियों या गंभीर वित्तीय संकट के समय ही देखी जाती थी, लेकिन अब यह सामान्य प्रक्रिया बन गई है, जो वित्तीय प्रबंधन और केंद्रीय बैंक की संस्थागत मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सहकारी संघवाद के लिए इसे सीधी चुनौती बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं और सप्लाई झटकों के कारण वित्तीय दबाव झेल रही है, तो राज्य भी उन्हीं चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। साथ ही उन्हें कल्याणकारी योजनाओं, महंगाई और बढ़ते खर्चों का बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि संघवाद का अर्थ यह नहीं हो सकता कि बोझ राज्य उठाएं और केंद्र आरबीआई के पूरे लाभ को अपने पास रखे। ऐसे असाधारण लाभों को साझा पूल में शामिल कर सभी राज्यों में समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए।
व्यापक आर्थिक स्थिति पर भाजपा सरकार को घेरते हुए Harpal Singh Cheema ने कहा कि केंद्र का आर्थिक प्रबंधन विफल हो चुका है और देश की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में है। उन्होंने कहा कि आरबीआई से लगातार भारी राशि लेने के बावजूद भाजपा सरकार डीजल, पेट्रोल और घरेलू रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के जरिए आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर होती जा रही है, जबकि महंगाई देशभर के लोगों को परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियां देश की अर्थव्यवस्था और संघीय ढांचे दोनों को कमजोर कर रही हैं।
प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए Harpal Singh Cheema ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की आर्थिक स्थिति पर जवाब देना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि आरबीआई से लगातार फंड लेने के बावजूद पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब देश आर्थिक दबाव और महंगाई से जूझ रहा है, तब प्रधानमंत्री को जवाबदेही से बचने के बजाय लोगों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए।









