
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक आस्था के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार जन्माष्टमी को खास माना जा रहा है। मान्यता है कि जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के साथ कुछ शुभ योगों का संयोग बन रहा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था। उस समय रोहिणी नक्षत्र था और चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित थे। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग को विशेष महत्व दिया जाता है।









