मध्य प्रदेशराज्य

ग्वालियर में ऑनलाइन सट्टे का बड़ा खेल बेनकाब, 100-पैनल वेबसाइट से 100 करोड़ का सालाना कारोबार; दुबई-श्रीलंका से जुड़े तार

ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे के नाम पर लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह का ग्वालियर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। न्यू सिटी सेंटर के विंडसर हिल्स स्थित डुप्लेक्स बी-20 से ऑनलाइन सट्टा और गेमिंग का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने शनिवार देर रात करीब साढ़े 12 बजे यहां दबिश देकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित 100-पैनल वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन सट्टा और गेमिंग संचालित कर रहे थे। शुरुआती जांच में नेटवर्क के तार दुबई और श्रीलंका में बैठे लोगों से जुड़े होने के सुराग मिले हैं। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिये सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का लेनदेन किया जा रहा था।

राउटर काटते ही विदेश से आने लगीं कॉल

पुलिस जैसे ही डुप्लेक्स में दाखिल हुई, उसने सबसे पहले राउटर डिस्कनेक्ट कर इंटरनेट लाइन काट दी। इसके तुरंत बाद श्रीलंका में बैठे कथित सरगना की ओर से वाट्सएप और टेलीग्राम पर लगातार कॉल आने लगीं। इससे पुलिस को नेटवर्क के विदेश में बैठे संचालकों तक पहुंचने के अहम सुराग मिले।

जांच में आरोपितों के मोबाइल और वाट्सएप चैट के जरिए दुबई और श्रीलंका में मौजूद कथित सरगनाओं से संपर्क की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

पांचों वेतन पर कर रहे थे काम

पुलिस ने जिन पांच लोगों को पकड़ा है, उनमें सोहित करेर, शांतनु श्रीवास, सुमित कुशवाह और दीपक आर्य ग्वालियर के रहने वाले हैं, जबकि दिनेश रायकवार दतिया का निवासी है। पुलिस के अनुसार, ये पांचों गिरोह के लिए वेतन पर काम कर रहे थे और वेबसाइट का संचालन संभालते थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि ग्वालियर में नेटवर्क का कथित सरगना सूरज आर्य है। उसी ने विंडसर हिल्स का डुप्लेक्स किराये पर लिया था और यहीं से पूरा ऑपरेशन चलाया जा रहा था।

पहले जिताते, फिर बड़ी रकम लगवाकर फंसाते

पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग में लोगों को फंसाने के लिए गिरोह एक खास तरीका अपनाता था। शुरुआत में कम रकम लगाने वाले खिलाड़ियों को जीत दिलाई जाती थी। इससे उनका भरोसा बढ़ता और वे लालच में आकर ज्यादा पैसा लगाने लगते थे।

जब खिलाड़ी बड़ी रकम हार जाता तो नुकसान की भरपाई के लालच में वह दोबारा गेमिंग करता। इसी दौरान उससे लगातार रकम लगवाई जाती और कथित तौर पर एक-एक व्यक्ति से लाखों रुपये तक वसूले जाते थे।

म्यूल खातों से USDT, फिर दुबई-श्रीलंका तक रकम

जांच में ऑनलाइन सट्टे से जुटाई गई रकम को दूसरे लोगों के बैंक खातों यानी म्यूल अकाउंट के जरिए आगे भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, रकम को इन खातों से USDT के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।

इसके बाद पे-वॉलेट के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी को कथित तौर पर दुबई और श्रीलंका भेजा जाता था। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क, म्यूल खातों और विदेश में बैठे कथित संचालकों की भूमिका की जांच कर रही है।

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