बिहारराज्य

बुजुर्गों के मोबाइल नंबर थानों में होंगे दर्ज, पुलिस हर हफ्ते करेंगी कॉल; मुजफ्फरपुर में सुरक्षा व्यवस्था का नया प्लान

मिठनपुरा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बुजुर्ग दंपति की जघन्य हत्या की वारदात के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

शहर में अकेले या अपने परिवारों के साथ रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने एक विशेष अभियान का शंखनाद किया है। इस संवेदनशील पहल की कमान खुद मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने संभाली है।

एसएसपी खुद दलबल के साथ सड़क पर उतरे और वरिष्ठ नागरिकों से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याएं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जाना। पुलिस कप्तान के इस कदम से बुजुर्गों में सुरक्षा का एक नया अहसास जागा है।

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इस विशेष अभियान के तहत एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित जुब्बा सहनी पार्क पहुंचे। सुबह की सैर और चर्चा के लिए पार्क में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों के बीच पहुंचकर एसएसपी ने उनसे सीधा जनसंवाद स्थापित किया।

उन्होंने बुजुर्गों से बेहद आत्मीयता से पूछा, आपको किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है? आपके आसपास का माहौल कैसा है? इस दौरान बुजुर्गों ने भी खुलकर अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और पुलिसिंग को लेकर अपने सुझाव कप्तान के सामने रखे। एसएसपी ने सभी को आश्वस्त किया कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए हर समय तत्पर है।

थाने में दर्ज होगा मोबाइल नंबर, हफ्ते में एक दिन आएगी पुलिस की कॉल

इस नई सुरक्षा व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस ने एक बेहद व्यावहारिक खाका तैयार किया है। योजना के मुताबिक:शहर के सभी थाना क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों का एक विशेष डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

सभी बुजुर्गों के मोबाइल नंबर और उनके पते संबंधित थानों में अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएंगे। थानों में तैनात पुलिसकर्मी सप्ताह में कम से कम एक बार इन नंबरों पर फोन कर बुजुर्गों की कुशलक्षेम पूछेंगे।

फोन कॉल के जरिए पुलिस यह भी जानने का प्रयास करेगी कि उनके इलाके में कोई संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक तत्व सक्रिय तो नहीं हैं।

एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने कहा कि बुजुर्ग समाज की धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मिठनपुरा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पुलिस और जनता के बीच सीधा संवाद जरूरी है। इस अभियान के जरिए हम हर बुजुर्ग तक पहुंचेंगे ताकि वे खुद को अकेला और असुरक्षित महसूस न करें।

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