सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वव्यापी हरित मंजूरी पर 2021 ज्ञापन को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र के 2021 कार्यालय ज्ञापन को रद्द कर दिया, जिसने पूर्व हरित अनुमोदन प्राप्त किए बिना काम शुरू करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘कानून में अस्वीकार्य’ करार देते हुए कहा, ‘ज्ञापन आनुपातिकता और तर्कसंगतता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 21 (जीवन का अधिकार, जिसमें स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है) का उल्लंघन करता है.’
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से अपने फैसले में सरकार को कुछ छूट देते हुए कहा कि यह फैसला संभावित रूप से लागू होगा और पहले पर्यावरण मंजूरी दी गई परियोजनाओं पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
पीठ ने कहा, ”2017 की अधिसूचना और 2021 के ज्ञापन के तहत अब तक परियोजना प्रस्तावकों को दी गई मंजूरी तब तक वैध रहेगी जब तक कि गुण-दोष के आधार पर चुनौती न दी जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को 2006 की अधिसूचना के तहत पूर्व मंजूरी व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए शुरू की गई परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने के लिए भविष्य में प्रशासनिक आदेश जारी करने से रोक दिया।









