चीन के Xinjiang एयरस्पेस से उड़ान भरने की तैयारी में भारत? यूरोप-अमेरिका की फ्लाइट्स का सफर हो सकता है छोटा

भारत अपनी एयरलाइंस के लिए चीन के शिनजियांग के ऊपर से हवाई मार्ग उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाश रहा है। अगर चीन की ओर से इस रूट को मंजूरी मिलती है, तो यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली भारतीय उड़ानों का समय और ईंधन खर्च दोनों कम हो सकते हैं। साथ ही पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद रखने से एयरलाइंस पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सकेगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत और चीन के बीच व्यापक बातचीत के दौरान वैकल्पिक हवाई मार्गों को लेकर भी चर्चा हुई है। नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और तेजी से विस्तार कर रहे विमानन क्षेत्र को समर्थन देने के लिए नए रूट तलाश रहा है। हालांकि, शिनजियांग के कुछ हिस्सों का एयरस्पेस सैन्य नियंत्रण में होने के कारण किसी भी नए कॉरिडोर के लिए चीनी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी।
पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने से बढ़ी परेशानी
पिछले साल दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद रखा है। इसका सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ा है। भारत से यूरोप, अमेरिका और कनाडा जाने वाली फ्लाइट्स को अब अरब सागर और मध्य एशिया के रास्ते लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है। लंबे रूट के कारण विमानों की ईंधन खपत बढ़ गई है। क्रू की लागत और यात्रा समय भी बढ़ा है। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, इस अतिरिक्त परिचालन लागत का बोझ हर साल सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच रहा है।
Air India ने सरकार से की चीन से बातचीत की मांग
एयर इंडिया ने सरकार से बीजिंग के साथ इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। एयरलाइन का मानना है कि शिनजियांग के ऊपर से हवाई कॉरिडोर मिलने पर लंबी दूरी के कई अंतरराष्ट्रीय रूट पर उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बेहतर हो सकती है। एयर इंडिया ने इस संभावित रूट से हर सप्ताह होने वाली महत्वपूर्ण बचत का भी अनुमान लगाया है।
भारत-चीन संबंधों में भी दिख रही है कुछ नरमी
छोटे रूट से ईंधन की खपत कम होने के साथ विमान के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ सकती है। नए एयर कॉरिडोर की संभावनाओं को भारत-चीन संबंधों में हालिया सुधार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत में हुई प्रगति के बाद दोनों देशों के बीच कुछ द्विपक्षीय गतिविधियां फिर शुरू हुई हैं। इसी क्रम में इस साल शंघाई के लिए सीधी उड़ानों की भी शुरुआत हुई है। हाल की बैठकों में दोनों पक्षों ने संबंधों के स्थिर विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।
भारत को ग्लोबल एविएशन हब बनाने की तैयारी
नए एयर कॉरिडोर की तलाश भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हाल में कहा था कि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के बाद सरकार की अगली प्राथमिकता विदेशी बाजारों के साथ हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है। भारत 2027 में नई दिल्ली में Routes Asia 2027 की मेजबानी करेगा। इसमें 55 से ज्यादा देशों, 115 एयरलाइंस और करीब 2,500 कारोबारी बैठकों के शामिल होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि इस आयोजन से नए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय एयर रूट खोलने, कारोबार और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।






