अखिलेश यादव ने बता दिया कब तक जारी रहेगा आंदोलन? यूपी से दिल्ली तक गरमाई सियासत!

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि लोकतंत्र बचाने के लिए उनका आंदोलन और धरना-प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
अखिलेश ने कहा कि सरकार उनकी आवाज क्यों नहीं सुनना चाहती? सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना चाहिए.
‘फर्जी वोट बनाते हैं और फर्जी चुनाव परिणाम तैयार करते हैं’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा सत्ता में बने रहना चाहती है. उन्होंने कहा कि फर्जी वोट बनाए जाते हैं, फर्जी वोट डाले जाते हैं और चुनाव के नतीजे भी फर्जी तैयार किए जाते हैं. अखिलेश के मुताबिक, लोकतंत्र की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए आंदोलन जारी रहेगा.
कानूनी और व्यावहारिक रास्ते अपनाने की बात कही
अखिलेश यादव से जब इस मामले में कानूनी विकल्पों और आगे आंदोलन जारी रखने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि जो भी कानूनी और व्यावहारिक तरीका होगा, उसे अपनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि आंदोलन की आवाज लगातार संबंधित लोगों तक पहुंचे.
अखिलेश ने सवाल उठाया कि सरकार उनकी बात क्यों नहीं सुनना चाहती. उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसा करना लोकतंत्र के हित में होगा. अखिलेश यादव ने साफ किया कि वह अपनी आवाज उठाते रहेंगे.
क्या है मामला?
दिल्ली में चल रहे प्रोटेस्ट की जड़ चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया है. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं और इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. इसे लेकर ही विपक्षी पार्टियां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
इधर चुनाव आयोग और बीजेपी ने जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाने या चुनाव में पक्षपात करने के आरोपों को खारिज किया है. उधर विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं. 6 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था, जिसे पुलिस ने रोक दिया था.
12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की योजना बनाई. वे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलकर अपनी मांगें रखना चाहते थे, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने मिलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि संबंधित मुद्दे पहले से अदालत में विचाराधीन हैं और विपक्ष को उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करनी चाहिए.









