मध्य प्रदेशराज्य

‘अस्पताल वेंटिलेटर पर, जिंदा को मृत बता रहे…’ दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री का मांगा इस्तीफा; पूछा- व्यापमं की अवैध भर्तियों का असर तो नहीं?

कमिश्नर कार्यालय के सामने कांग्रेस के अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और न्याय सत्याग्रह में सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में ऐसी बदहाली है कि यहां जिंदा इंसान को मृत घोषित कर दिया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और स्टाफ की ये गंभीर गलतियां कहीं व्यापमं घोटाले के माध्यम से हुई अवैध भर्तियों का नतीजा तो नहीं हैं।

दिग्विजय ने रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल की मौजूदा स्थिति पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अस्पताल को पूरी तरह से बदहाल और वेंटिलेटर पर लाकर खड़ा कर दिया है। शुक्ल अपनी नाकामी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। अस्पतालों में मौतों के आंकड़ों और घटिया स्वास्थ्य सामग्री की आपूर्ति की उच्च स्तरीय जांच हो।

1972 में जनसंघ ने दिया था ऑफर : दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि 1972 में जब वे छात्र राजनीति में सक्रिय थे, तब उन्हें जनसंघ की ओर से पार्टी में शामिल होने का ऑफर मिला था। उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकराकर कांग्रेस का दामन थामा। उन्होंने कहा कि जनसंघ की नीतियां धर्म के आधार पर समाज को बांटने वाली थीं, जबकि मेरा परिवार शुरू से कांग्रेस विचारधारा से जुड़ा रहा है।

सांसद जनार्दन मिश्रा बोले- मंत्री के बंगले पर किया हमला

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के बंगले पर रविवार को युवा कांग्रेस के उग्र प्रदर्शन के जवाब में भाजपा के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतर आए। सांसद जनार्दन मिश्रा की अगुवाई में पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने कांग्रेस के इस कदम को पारिवारिक सुरक्षा पर हमला और गुंडागर्दी करार देते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री के निजी निवास पर तब हमला किया, जब उनका परिवार वहां मौजूद था।

पूर्व विधायक नीलम मिश्रा ने आरक्षण पर उठाए सवाल

सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम मिश्रा ने आरक्षण पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के बच्चे 90 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं, जबकि 37 प्रतिशत से ऊपर वाले अनपढ़ लोगों को डॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति दी जा रही है। डॉक्टर के बजाय नर्स ऑपरेशन कर रही हैं जिससे लोगों की मौत हो रही है।

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