मणिपुर जातीय हिंसा: राहत शिविरों में हुई मौतों से सुप्रीम कोर्ट स्तब्ध, मुख्य सचिव से पूछा जवाब

मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के राहत शिविरों में हुई कई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह जांच करने, आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इस बात पर हैरानी जताई कि राहत शिविरों में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की अप्राकृतिक मौतों सहित अन्य लोगों की मौत के बारे में न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति द्वारा दी गई सूचना पर कोई महत्वपूर्ण कदम क्यों नहीं उठाया गया।
पीठ ने कहा, ”हम मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश देते हैं कि वह मणिपुर में राहत शिविरों में हुई मौतों, विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों पर हलफनामा दायर करें। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा कि राहत शिविरों में अप्राकृतिक मौतों का सामना करने वाले आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को मुआवजे के रूप में केवल 20,000-30,000 रुपये ही क्यों दिए गए।
शीर्ष अदालत ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को इस मुद्दे पर एक अलग स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी अप्राकृतिक मौत के मामलों में प्राथमिकी दर्ज की जाए। पीठ ने एमएसएलएसए से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि प्राथमिकी की तेजी से जांच की जाए और राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद 3 मई, 2023 को मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए थे और कई सौ घायल हो गए थे। हिंसा में हजारों लोग विस्थापित हुए और तब से राहत शिविरों में रह रहे हैं।
पीठ ने न्यायमूर्ति मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद गुरुवार का आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि मणिपुर के राहत शिविरों में 30 से अधिक मौतें हुई हैं और उनमें से एक की मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद हुई है।
पीठ ने उम्मीद जताई कि 2023 की जातीय हिंसा से उत्पन्न सीबीआई और एनआईए के मामलों की विशेष सुनवाई के लिए गठित दो विशेष निचली अदालतें अपने मुकदमे तेजी से समाप्त करेंगी।
इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार और मणिपुर हिंसा के मामलों में सीबीआई द्वारा जांच की निगरानी कर रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी दत्तात्रेय पडसलगीकर ने कानूनी सेवा के वकील को मामलों का विवरण उपलब्ध कराया है और याचिकाकर्ता पीड़ित अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए उनका लाभ उठा सकते हैं।
सीबीआई और मणिपुर सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि जांच एजेंसी ने 31 मामलों की जांच की है और उनमें से 28 में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है। जबकि सीबीआई के तीन मामलों की जांच चल रही है।
सीबीआई मामलों के अलावा, राज्य ने आठ जिलों में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए 42 एसआईटी का गठन किया, जो कि उन्होंने कहा कि 3,020 मामले दर्ज किए गए हैं और उनमें से 302 में आरोपपत्र दायर किए गए हैं।
एएसजी ने कहा कि 1,583 मामलों में एसआईटी ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की है और 1,135 मामलों में जांच चल रही है।









