उत्तर प्रदेशराज्य

UP Weather: कल यूपी के इन 13 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

उत्तर प्रदेश में मानसून की चाल एक बार फिर बदलने वाली है. मौसम विभाग की ओर से जारी अपडेट के अनुसार, 20 सितंबर को प्रदेश में बारिश का जोर धीरे-धीरे कम होने जा रहा है. जहां एक तरफ पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 सितंबर से मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने के आसार हैं. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. हालांकि 20 सितंबर की सुबह लखनऊ और आसपास के बुंदेलखंड और मध्य यूपी के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.

इन 13 जिलों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, 20 सितंबर को प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. जिन जिलों और उनके आसपास के इलाकों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है उनमें लखनऊ,  कानपुर नगर, बांदा,   फतेहपुर,   उन्नाव,   रायबरेली,   अमेठी,   अयोध्या,   बाराबंकी,  हमीरपुर,   महोबा जैसे जिले शामिल हैं. इन क्षेत्रों में निचले इलाकों में जलजमाव, कच्चे-अस्थायी ढांचों को नुकसान बिजली की व्यवस्था में व्यवधान और सड़कों पर फिसलन के कारण यातायात में मामूली बाधा की चेतावनी दी गई है.

20 सितंबर को दिनभर कैसा रहेगा मौसम?

20 सितंबर की सुबह मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.  पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं पर हल्की वर्षा या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी. हालांकि मौसम विभाग की तरफ से 20 सितंबर के दिन के लिए कोई खास चेतावनी जारी नहीं की गई है.

पूर्वी उत्तर प्रदेश: इस क्षेत्र में 20 सितंबर से मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है. इसके बाद 21 और 22 सितंबर को भी पूरे प्रदेश में मौसम के शुष्क रहने की संभावना जताई गई है.

किसानों और आम जनता के लिए सलाह

मौसम विभाग ने भारी बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए आम जनमानस और किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है.

आम जनता के लिए: कच्चे व अस्थायी मकानों से दूर रहें. अचानक आने वाले जलभराव वाले रास्तों से बचें और आकाशीय बिजली की संभावना पर सुरक्षित स्थानों में आश्रय लें.किसानों के लिए: धान, मक्का, गन्ना, अरहर, उड़द-मूंग और सब्जी की फसलों वाले खेतों में जलभराव न होने दें.

अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए तुरंत नालियों की सफाई करें ताकि फसलों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे और फफूंद जनित रोगों से बचाया जा सके.

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