सरकार की ‘फरिश्ते योजना’ बनी वरदान, 223 को मिली फ्री सुविधा

चंडीगढ़-पंजाब सरकार द्वारा सडक़ हादसा पीडि़तों को निर्विघ्न इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई फरिश्ते योजना कीमती जानें बचाने के लिए वरदान साबित हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो एनसीआरबी के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग 1400 सडक़ हादसे और 400 मौतें होती हैं। जबकि अकेले पंजाब में हर साल लगभग 5000 मौतें सडक़ दुर्घटनाओं के कारण होती हैं। फरिश्ते योजना का उद्देश्य दुर्घटना पीडि़तों को बिना किसी निश्चित राशि, कैपिंग, अमाउंट की सीमा के व्यापक इलाज प्रदान करके इस गंभीर मुद्दे को हल करना है। राज्य की यह महत्वपूर्ण योजना, जिसका उद्देश्य सडक़ किनारे दुर्घटनाओं में चोट लगने के कारण होने वाली मौत की दर को कम करना है और सरकारी व निजी अस्पतालों में तुरंत और निर्विघ्न इलाज प्रदान करना है 25 जनवरी 2024 को अधिसूचित की गई थी। यह योजना पंजाब राज्य के क्षेत्र में होने वाले सभी सडक़ हादसा पीडि़तों के लिए बिना किसी शर्त या जाति, धर्म, राष्ट्रीयता और जन्म स्थान के भेदभाव के लागू होती है और इसके तहत दुर्घटना पीडि़तों को बिना किसी सीमा के व्यापक इलाज प्रदान किया जाता है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी एसएचए पंजाब की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ बबीता ने बताया कि आम लोगों को आगे आकर दुर्घटना पीडि़तों की मदद करने और उनकी जान बचाने के लिए प्रेरित करने हेतु ऐसे फरिश्तों को नकद इनाम और प्रशंसा पत्र के साथ सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति स्वेच्छा से दुर्घटना पीडि़तों की जान बचाने में मदद करता है, उसे फरिश्ता माना जाएगा और उसे प्रशंसा पत्र और 2000 रुपए की नकद इनामी राशि के साथ सम्मानित किया जाएगा। सीईओ ने बताया कि शुरुआत से लेकर इस योजना ने सडक़ हादसों के परिणामस्वरूप होने वाली मौतों की दर को कम करने में अपनी प्रभावशीलता साबित करते हुए लगभग 223 दुर्घटना पीडि़तों को मुफ्त चिकित्सा इलाज प्रदान किया है। उन्होंने आगे कहा कि अब तक 66 फरिश्ते राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के साथ पंजीकृत हुए हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने 16 फरिश्तों के निस्वार्थ प्रयासों को मान्यता देते हुए 15 अगस्त 2024 को उन्हें प्रति पीडि़त 2000 रुपए की नकद इनामी राशि और प्रशंसा पत्र देकर फरिश्ते पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने आगे कहा कि शेष फरिश्तों को भी उनके संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों द्वारा सम्मानित किया जा रहा है।







