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पुराने वाहनों पर बैन के फैसले से पीछे हटी दिल्ली सरकार

नई दिल्ली

दिल्ली में पुराने वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर बैन लगाने वाले आदेश पर रेखा सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा है। पहली जुलाई से लागू इस आदेश को अभी महज दो दिन ही हुए थे कि गुरुवार को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को पत्र लिखकर इसे रोकने को कहा है। सिरसा ने सीएक्यूएम को भेजे पत्र में लिखा है कि हम आयोग से आग्रह करते हैं कि निर्देश संख्या 89 के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, जिसमें एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों को ईंधन देने से मना किया गया है, जब तक कि स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) प्रणाली पूरे एनसीआर में एकीकृत नहीं हो जाती। हमें विश्वास है कि दिल्ली सरकार के चल रहे बहुआयामी प्रयासों से वायु गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार आएगा। गुरुवार को प्रेस कान्फ्रेंस में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि हमने उन्हें बताया है कि जो ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं, वे मजबूत सिस्टम नहीं हैं और उनमें अभी भी कई चुनौतियां हैं। जिसकी वजह से लोगों को परेशानी हो रही है।

तकनीकी गड़बडिय़ां, सेंसर का काम न करना और स्पीकर का खराब होना, ये सभी चुनौतियां हैं। इसे अभी तक एनसीआर डाटा के साथ जोड़ा नहीं गया है। यह एचएसआरपी प्लेटों की पहचान करने में सक्षम नहीं है। हमने यह भी कहा कि गुडग़ांव, फरीदाबाद और गाजियाबाद और बाकी एनसीआर में अभी तक ऐसा कानून लागू नहीं किया गया है। तब तक के लिए इस पर रोक लगाई जाए। दिल्ली में बीती पहली जुलाई, 2025 से उम्र से ज्यादा पुरानी गाडिय़ों को पेट्रोल-डीजल नहीं नहीं मिल रहा है। यानी अगर आपकी डीजल गाड़ी 10 साल से पुरानी है या पेट्रोल गाड़ी 15 साल से पुरानी है, तो उसे पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जा रहा। इतना ही नहीं उसे जब्त भी करने का निर्देश है। दरअसल, अप्रैल 2025 में सीएक्यूएम ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि पहली जुलाई से सभी एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) यानी तय उम्र पार कर चुकी गाडिय़ों को फ्यूल देना बंद किया जाए। दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर 30 जून तक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने का आदेश दिया गया था। ये कैमरे नंबर प्लेट पढक़र यह पहचान लेंगे कि गाड़ी कितनी पुरानी है। यदि कोई गाड़ी तय समय सीमा से ज्यादा पुरानी पाई गई, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। मामले में मोटर व्हीकल एक्ट, 1989 के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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