
चंडीगढ़, 16 जनवरी :
पंजाब विधानसभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस, जम्मू और कश्मीर की एम.बी.बी.एस. मान्यता रद्द करने का फैसला न केवल विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि शिक्षा को धर्म और राजनीति से जोड़ने का एक घृणित उदाहरण भी है। इस मेडिकल कॉलेज में दाखिले केंद्रीय परीक्षा नीट, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा भी मान्य है, की मेरिट के अनुसार पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से किए गए थे।
स्पीकर ने जोर देकर कहा कि संस्था का निरीक्षण करने के बाद यह बात सामने आई है कि इंस्टीट्यूट में किसी विशेष धर्म के विद्यार्थियों की बहुलता होने के कारण एम.बी.बी.एस. की मान्यता रद्द करना पूरी तरह अनुचित, पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संस्था में इतनी बड़ी खामियां थीं तो मात्र चार महीने पहले मान्यता किस आधार पर दी गई थी? इसका जवाब देना राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की जिम्मेदारी है।
स्पीकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी शैक्षणिक संस्था को बंद करने के लिए आंदोलन करना और मान्यता रद्द होने पर जश्न मनाना सामाजिक पतन का संकेत है। शिक्षा का उद्देश्य अज्ञानता के अंधकार को दूर करना है, न कि नफरत की खाई को और गहरा करना। मेडिकल कॉलेज जैसी पेशेवर संस्था को सुधार का अवसर दिए बिना बंद करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक है।
स्पीकर ने मांग की कि इस फैसले की तुरंत समीक्षा की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रहें और शिक्षा को धार्मिक या राजनीतिक एजेंडों से दूर रखा जाए।









