पंजाब

भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत गंभीर हालत में जन्मे नवजात बच्चे के स्वस्थ होने से डॉक्टरों की चिंता उम्मीद में बदली।

चंडीगढ़/बठिंडा, 26 अप्रैल 2026: नवजात शिशु की पहली किलकारी राहत देने वाली होनी चाहिए, लेकिन कई बार वह सन्नाटा लेकर आती है। जिला बठिंडा के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।

सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में दुनिया में आई। उसका वजन मात्र 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य जन्म वजन से काफी कम था। जन्म के तुरंत बाद उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगी और बिना चिकित्सकीय सहायता सांस लेना संभव नहीं था। डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत इलाज शुरू किया। बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे। मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी।

अगले 17 दिनों तक लगातार देखभाल और उपचार जारी रहा। बच्ची को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) सहायता दी गई, उसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। इस दौरान उसे पीलिया भी हुआ, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया। सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए उसे पोषण, गर्माहट और स्थिरता दी गई।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर रीडिंग के साथ आता है।” धीरे-धीरे बच्ची की सांस सामान्य होने लगी, प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं और उसका शरीर मजबूत होने लगा।

इस मामले में इलाज में कोई देरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना आर्थिक चिंता के उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।

17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है। वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है। नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से घर गई।

एक अन्य मामले में होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री सेहत कार्ड के तहत कवर हुआ। पंजीकरण उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए अच्छा इलाज करवा सकता है। यह बहुत बड़ी बात है।”

पंजाब के एनआईसीयू में अब भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर से नहीं, उम्मीद से भरी होती है। वहां मॉनिटर पर हर दिन मजबूत होती एक नन्ही धड़कन दिखाई देती है, और कई बार यही उम्मीद सब कुछ बदल देती है।

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