
चंडीगढ़, 30 मई 2026: राज्य में लड़कियों की शिक्षा, किशोर स्वास्थ्य और लैंगिक-संवेदनशील शिक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल-आधारित मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा पहलों में से एक की शुरुआत की है।
28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में “मासिक धर्म स्वच्छता पाठ्यक्रम” के चरणबद्ध विस्तार की घोषणा की। इस कार्यक्रम के पहले सत्र का आयोजन 29 मई 2026 को किया गया। इस पहल से 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छठी से दसवीं कक्षा तक की 3.4 लाख से अधिक छात्राओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह पहल सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके माध्यम से लड़कियों को जागरूकता, आत्मविश्वास, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। बड़े स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को कक्षाओं तक पहुंचाकर सरकार ने ऐसे विषय को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है, जो लंबे समय से झिझक, मिथकों और सामाजिक वर्जनाओं से घिरा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म कभी भी लड़कियों की शिक्षा, आत्मविश्वास, भागीदारी, स्वास्थ्य या स्कूल जीवन में बाधा न बने। यह पहल भारत के सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के अनुरूप है, जिनमें मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को किशोरियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से सीधे जुड़ा हुआ माना गया है।
भगवंत मान सरकार ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था WASH United के सहयोग से शुरू किया है, जो वैश्विक स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत है। इस पहल के तहत विशेष रूप से तैयार किए गए पंजाबी भाषा के पाठ्यक्रम के माध्यम से संरचित कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्राएं विषय को बेहतर ढंग से समझ सकें।
पाठ्यक्रम की मुख्य पात्र 10 वर्षीय लड़की ‘रूबी’ है, जिसकी कहानी के माध्यम से छात्राओं को मासिक धर्म और शारीरिक परिवर्तनों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसमें कक्षा आधारित चर्चाएं, सहभागिता गतिविधियां और सीखने को रोचक बनाने वाले अभ्यास शामिल हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को मासिक धर्म, स्वच्छता और स्वयं की देखभाल के बारे में जागरूक करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और स्कूलों में सहयोगी वातावरण तैयार करना है।
राज्यभर में कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगभग 7,200 शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह कार्यक्रम तीन सत्रों वाले संरचित मॉडल पर आधारित है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु-उपयुक्त मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा शामिल है।
कार्यक्रम के राज्यव्यापी विस्तार से पहले लगभग 100 राज्य स्तरीय संसाधन व्यक्तियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जिसके बाद जिला स्तर पर हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इससे स्कूलों में ऐसा सुरक्षित वातावरण तैयार होगा, जहां लड़कियां बिना झिझक और डर के सवाल पूछ सकेंगी तथा सही जानकारी प्राप्त कर सकेंगी।
इस पहल की शुरुआत राज्य के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद की गई है, जिसमें 45,000 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया था। पंजाब सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से मासिक धर्म संबंधी शिक्षा देने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 94 प्रतिशत ने पूरे राज्य में इसके विस्तार की सिफारिश की। लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने इसे पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी बताया तथा 80 प्रतिशत ने कक्षा सत्रों में छात्राओं की सक्रिय भागीदारी देखी।
फरीदकोट की शिक्षिका जसप्रीत कौर ने कहा कि यह पाठ्यक्रम मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को दूर करने में प्रभावी है और छात्राओं को प्रश्न पूछने तथा अपने अनुभव साझा करने के लिए सुरक्षित मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्री के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनती है।
अमृतसर की शिक्षिका मोनिका सूद ने बताया कि छात्राओं ने सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने व्यक्तिगत अनुभव खुले तौर पर साझा किए। उनके अनुसार, मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता की कमी किशोरियों के लिए कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है और यह कार्यक्रम उन्हें अपने शरीर को सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समझने में मदद करता है।
मोगा की शिक्षिका सिलवी ने कहा कि इस कार्यक्रम ने स्कूलों में मासिक धर्म जैसे विषय पर खुलकर चर्चा करना संभव बनाया है। उनके अनुसार, जो छात्राएं और शिक्षिकाएं पहले इस विषय पर बात करने में झिझकती थीं, वे अब आत्मविश्वास के साथ चर्चा कर पा रही हैं।
कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्राओं ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। संगरूर की नौवीं कक्षा की छात्रा कोमलप्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें यह समझने में मदद की कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। मोगा की छात्रा डिंपल रानी ने बताया कि सत्र बहुत रोचक थे और उन्होंने घर जाकर अपनी मां के साथ भी सीखी हुई बातें साझा कीं। दसवीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि इस पाठ्यक्रम ने लड़कियों को बिना किसी झिझक के खुलकर बात करने का आत्मविश्वास दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल के माध्यम से पंजाब न केवल मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता का विस्तार कर रहा है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, प्रगतिशील और सहयोगी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण भी कर रहा है। सरकारी स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को संस्थागत रूप देकर पंजाब सरकार छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा में उनकी भागीदारी और सशक्तिकरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
यह पहल मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रहे व्यापक शिक्षा सुधार कार्यक्रम का भी हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।









