…सात समंदर पार से 18 घंटे में पहुंची बेटी, पिता को दी मुखाग्नि

पिता की मौत की खबर… हजारों किलोमीटर की दूरी… सामने लंबा हवाई सफर और समय की चुनौती। लेकिन पिता को अंतिम विदाई देने की बेटी की तड़प ने हर दूरी को छोटा कर दिया। अमेरिका में पिछले नौ वर्षों से प्रैक्टिस कर रहीं डॉ. भारती गर्ग पिता सतीश गर्ग के निधन की सूचना मिलते ही टिकट बुक कर महज 18 घंटे में करीब 13 हजार किलोमीटर का सफर तय कर फिरोजपुर झिरका पहुंच गईं। पिता की चिता के सामने खड़ी बेटी ने जब उन्हें मुखाग्नि दी तो आंखों से निकले आंसुओं ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।
यह दृश्य ऐसे समय में सामने आया है जब सोनीपत में पिता के अंतिम संस्कार में बेटियों के शामिल न हो पाने की खबर चर्चा में है। दोनों घटनाओं ने समाज में बेटियों के माता-पिता के प्रति लगाव, जिम्मेदारी और बदलते सामाजिक सरोकारों को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है। फिरोजपुर झिरका में डॉ. भारती गर्ग का अपने पिता को अंतिम विदाई देने के लिए अमेरिका से इतनी कम अवधि में पहुंचना पिता-पुत्री के रिश्ते की गहराई को बयां करता है।









