बिहारराज्य

खगड़िया में अंधविश्वास, मृत बच्चे के जिंदा होने की आस में कोलकाता-कटिहार के बाबाओं का इंतजार, 20 घंटे तक झाड़-फूंक

खगड़िया जिले के परबत्ता थाना क्षेत्र अंतर्गत तेमथा करारी पंचायत के वार्ड संख्या दो स्थित शर्मा टोला में अंधविश्वास की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।

सर्पदंश से 10 वर्षीय मासूम बच्चे की मौत के बाद उसके स्वजन जीवित होने की आस में 20 घंटे से अधिक समय तक शव को घर में रखकर झाड़-फूंक करवाते रहे। पुलिस और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों की लंबी मान-मनौव्वल के बाद अंततः गुरुवार दोपहर को स्वजन शव के पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए। मृतक की पहचान बमबम कुमार (राजमिस्त्री) के 10 वर्षीय पुत्र सिद्धार्थ कुमार के रूप में हुई है।

कैसे घटी पूरी घटना?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 4:30 बजे सिद्धार्थ गांव के भगवती मंदिर के पास खेल रहा था, तभी उसे एक जहरीले सांप ने डस लिया। शुरुआत में स्वजन उसे स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक और नीर-भस्म पिलाने के चक्कर में रहे। जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तब उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परबत्ता ले जाया गया।

अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनय कुमार ने बताया कि बुधवार शाम करीब 6:30 बजे स्वजन बच्चे को लेकर पहुंचे थे, जहां जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। चिकित्सक का कहना था कि अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम (एंटीवेनम) मौजूद है, और यदि स्वजन समय पर बच्चे को अस्पताल ले आते, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।

अंधविश्वास का खौफनाक चक्र और बाबा का इंतजार

अस्पताल में डॉक्टर द्वारा मृत घोषित किए जाने के बावजूद स्वजन और कुछ ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुए। वे शव को लेकर सीधे रहीमपुर स्थित भगवती मंदिर चले गए, जहां पूरी रात झाड़-फूंक का दौर चलता रहा।

गुरुवार की सुबह स्वजन शव को घर ले आए और किसी कथित तांत्रिक बाबा के आने का इंतजार करने लगे। स्वजनों का कहना था कि कभी बाबा कोलकाता से तो कभी कटिहार से आ रहे हैं और वे बच्चे को जीवित कर देंगे। वे फोन पर लगातार बाबा के संपर्क में रहकर निर्देश ले रहे थे और अंतिम संस्कार या पोस्टमार्टम से साफ इनकार कर रहे थे।

पुलिस और स्थानीय लोगों की पहल पर हुआ समझौता

घटना की सूचना मिलते ही परबत्ता थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार, छात्र नेता सुशील, प्रशांत सुमन और स्थानीय आपदा मित्र ऋषि कुमार मौके पर पहुंचे। स्वजन किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं थे, लेकिन पुलिस और स्थानीय युवाओं ने धैर्य के साथ उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कानून की प्रक्रिया समझाई।

आखिरकार, काफी समझाने-बुझाने के बाद गुरुवार की दोपहर करीब तीन बजे स्वजन शव के पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए खगड़िया सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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