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धान का कटोरा पड़ा सूखा! मुंगेर के संग्रामपुर में सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त, 150 एकड़ खेत परती, किसानों की बढ़ी चिंता

Munger Sangrampur Drought Condition Paddy Crop Damage News : कभी लहलहाती धान की फसलों और समृद्ध पैदावार के कारण ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाला मुंगेर जिले का संग्रामपुर प्रखंड इस बार गंभीर कृषि संकट के दौर से गुजर रहा है।

कमजोर मानसून, बदहाल सरकारी सिंचाई व्यवस्था और नदियों में बेतरतीब बालू खनन ने खेतों तक पानी पहुंचने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। इसके चलते इस बार धान की पैदावार घटने की भारी आशंका जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र के किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

प्रखंड में इस वर्ष करीब छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, कृषि विभाग कागजों में 99 प्रतिशत रोपनी का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि करीब 80 प्रतिशत क्षेत्र में ही किसी तरह जैसे-तैसे रोपनी हो सकी है।

देर से आई वर्षा के बीच किसानों ने रोपनी की कोशिश तो की, लेकिन बाद में मूसलधार बारिश होने से कई जगह नई रोपी गई फसल खेतों में टिक ही नहीं सकी।

Munger Sangrampur Faces Paddy Crisis Amidst Irrigation Failure (1)

तीन पंचायतों में 150 एकड़ खेत परती, सरकारी फार्म की जमीन भी सूखी

सिंचाई के साधनों के पूरी तरह ठप हो जाने के कारण प्रखंड की बढ़ौनियां, कटियारी और कुसमार पंचायत में एक बड़े भूभाग पर धान की रोपाई संभव ही नहीं हो पाई। इन तीनों पंचायतों को मिलाकर करीब 150 एकड़ जमीन पूरी तरह परती रह गई है। इतना ही नहीं, राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र की करीब साढ़े छह एकड़ उपजाऊ जमीन भी पानी के अभाव में सूखी पड़ी है।

आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों के सामने चिलचिलाती धूप और उमस के बीच खेतों में नमी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बालू खनन ने मारी सिंचाई डांढ़ की धार, अतिक्रमण की भेंट चढ़ा जलाशय

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में बदुआ और बेलहरनी नदी से निकलने वाली प्राकृतिक सिंचाई डांढ़ पूरे इलाके के खेतों की प्यास बुझाती थी। बदुआ जलाशय बनने के बाद सिंचाई तंत्र और मजबूत हुआ था। लेकिन नदियों में अंधाधुंध और अनियंत्रित बालू उत्खनन के कारण नदियों का जलस्तर काफी गहरा हो गया,

जिससे प्राकृतिक डांढ़ धीरे-धीरे सूखकर मृतप्राय हो गईं। वहीं, बदुआ जलाशय से निकली नहरों और नालों पर अतिक्रमण होने से प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद आज किसान पूरी तरह से अनिश्चित बारिश पर निर्भर हो चुके हैं।

पिछले वर्षों की तुलना में उपज घटने की आशंका, कृषि अधिकारी ने जताई चिंता

कभी जिस संग्रामपुर की पहचान लहलहाते धान के खेतों से थी, वहां के किसान इस बार अपनी कटोरी खाली रहने की आशंका से घबराए हुए हैं। पूरे मामले पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) अभिनव कुमार ने बताया कि इस सीजन में उम्मीद के मुताबिक बारिश काफी कम हुई है।

हालांकि उनका दावा है कि अधिकांश क्षेत्रों में रोपनी कराई गई है, लेकिन कुछ पंचायतों में पानी के अभाव से खेत परती रह जाने की बात सही है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर माना कि पिछले वित्तीय वर्ष (2024–2025) के मुकाबले इस बार धान के कुल उत्पादन में गिरावट आने की पूरी संभावना दिख रही है।

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