उत्तर प्रदेशराज्य

बरेली हिंसा केस में तौकीर रजा की जमानत खारिज, कोर्ट बोला- ‘सर तन से जुदा’ नारा भारत की आजादी को देता है चुनौती

बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने सोमवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ‘सर तन से जुदा’ नारे को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि ‘सर तन से जुदा’ नारा भारत की आजादी को चुनौती देता है। इसकी तुलना ‘अल्लाहु-अकबर’, ‘जय श्री राम’ से नहीं की जा सकती है।

जानिए क्या बोला इलाहाबाद हाई कोर्ट?

26 सितंबर 2025 को बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को मुख्य आरोपी बनाया गया है। हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि “गुस्ताख-ए-नबी के एक ही सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा” नारे की तुलना “नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु-अकबर”, “जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल”, “जय श्री राम” या “हर हर महादेव” जैसे धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती है।

संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाला नारा

कोर्ट ने कहा कि ये नारे भगवान या गुरु के प्रति सम्मान दिखाते हैं, लेकिन “सर तन से जुदा” नारा “कानून के अधिकार और भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने के अलावा कुछ नहीं है और लोगों को “हथियार विद्रोह के लिए उकसाता है जो कानून के तहत सज़ा के लायक है।”

कोर्ट ने कहा कि इस तरह का नारा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है, जो कानून के तहत दंडनीय है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मौलाना तौकीर रजा की ओर से लोगों को इस तरह एकत्र होने के लिए बुलाना और इसके बाद हुई घटनाओं को देखते हुए इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं है।

26 सितंबर 2025 को हुई थी बरेली में हिंसा

बता दें कि बरेली में 26 सितंबर 2025 को हिंसा हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, भीड़ के जुटने, पुलिस के साथ टकराव, पथराव और पेट्रोल बम फेंके जाने की घटनाएं हुई थीं। मामले में मौलाना तौकीर रजा को प्रमुख आरोपी बनाया गया है।

सोमवार को हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा के साथ डॉक्टर नफीस की जमानत याचिका भी खारिज कर दी, जबकि मामले के अन्य आरोपियों को जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है।

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