
चंडीगढ़-चंडीगढ़ विधुत विभाग और उप्र के वाराणसी व आगरा डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ शुक्रवार को हरियाणा के बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किए और आंदोलन के साथ एकजुटता प्रकट की। इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने बताया कि शुक्रवार को बिजली कर्मचारियों ने सब-डिवीजन स्तर पर विरोध सभाओं का आयोजन किया और निजीकरण के प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यूनियन ने सभी निगमों के एमडी को पत्र लिखकर दो टूक कहा कि हरियाणा का कोई भी कर्मचारी चंडीगढ़ में ड्यूटी देने नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ विद्युत बोर्ड देश में सबसे सस्ती दरों पर बिजली कंज्यूमर को देने के बावजूद प्रति वर्ष सैकड़ों करोड़ का मुनाफा कमा रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार एक निजी कंपनी को हजारों करोड़ की परिस्थितियों को मात्र 871 करोड़ में सौंपा जा रहा है। इसमें भारी भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
जिसकी जांच की आवश्यकता है। चंडीगढ़ प्रशासन ने निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कुचलने के लिए एस्मा लागू किया जाना घोर निंदनीय है। उधर, शुक्रवार को निजीकरण एवं एस्मा के खिलाफ सेक्टर-17 चंडीगढ़ में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबाए सचिव सुदीप दत्ता आदि नेता पहुंचे और संबोधित किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता यूटी पावर मैन यूनियन चंडीगढ़ के अध्यक्ष ध्यान सिंह ने की। महासचिव गोपाल दत्त जोशी द्वारा संचालित प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में कर्मचारियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि उप्र सरकार ने घाटे के नाम पर वाराणसी व आगरा डिस्कॉम को निजी हाथों में सौंपने जा रही है और दूसरी तरफ चंडीगढ़ प्रशासन मुनाफे देने वाले विभाग को निजी हाथों में सौंपने जा रही है। उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर निजीकरण विरोधी दिवस का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।








