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किसान-मजदूरों का विकास, देश की तरक्की

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश की तरक्की के लिए गांवों के किसान-मजदूरों को समृद्ध करना जरूरी है। हमारे देश की उन्नति में 12 से 14 प्रतिशत उन्नति खेतीबाड़ी व सहयोगी इंडस्ट्री से आती है। नितिन गडकरी पंजाब के अमृतसर में सहकार भारती द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेकर देशभर से आए हुए प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 22 से 24 फीसदी ग्रोथ मेन्यूफैक्चर और 52 से 54 प्रतिशत ग्रोथ सर्विस सेक्टर से आती थी। स्वाधीनता आंदोलन की शुरूआत में 90 फीसदी आबादी गांवों में रहती थी, लेकिन अब गांवों में लोग नहीं रह रहे है। 30 फीसदी आबादी गांवों से निकल कर बड़े शहरों में चली गई है। अमृतसर में सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर और राष्ट्रीय महामंत्री डा. उदय जोशी की अध्यक्षता में आयोजित अधिवेशन में नितिन गडकरी ने कहा कि बड़े शहरों में लोग झोपड़-पट्टी में रह रहे हैं। वह मजबूरी से शहरों में गए, क्योंकि वहां अच्छे घर व सुविधाएं नहीं थी। हमारे किसान व मजदूरों की हालत अच्छी नहीं है। अगर आज हमारी आॢथकता को मजबूत करना है तो हमें गांव, गरीब, किसान, मजदूर और को ग्रामीण व कृषि व जंगल के क्षेत्र को समृद्ध करना होगा।

गडकरी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक आ रही हैं। अगर गांवों का उद्धार करना है तो सहकार क्षेत्र की प्रथमिकता में किसानों को रखो। यह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है। हमारा किसान अब अन्नदाता नहीं है, वह ऊर्जा दाता हो गया है, ईंधन दाता है। केंद्रीय मंत्री ग्रीन ऊर्जा आधारित तकनीक को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि सीएनजी पर अब बस आ रही हैं और ट्रेक्टर भी आ रहे हैं। इलेक्ट्रिक पर चलने वाला, सीएनजी पर चलने वाला और इथेनॉल पर चलने वाला ट्रेक्टर आ रहे हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने सीएनजी पर चलने वाला ट्रेक्टर लांच किया। जिसमें पेट्रोल का खर्च आधे से भी कम हो गया है। इलेक्ट्रिक ट्रेक्टर लांच किया जाएगा। अगर 15.20 किसान एक ट्रेक्टर ले लेते हैं, तो 1200 से 1500 प्रति एकड खर्च में पूरा काम हो जाएगा। इस अवसर पर बोलते हुए सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर ने कहा कि 2021 में जब सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई तो देश में सहकारिता के प्रति एक नई चेतना का निर्माण हुआ। इस बात के लिए हम सभी को गौरवान्वित होना चाहिए कि इसके लिए सबसे अधिक योगदान सहकार भारती का रहा है।

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