रेपिस्टों को नपुंसक बनाने की मांग पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट भारत में महिलाओं, बच्चों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों से निपटने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने के लिए विभिन्न उपायों की मांग करने वाली याचिका को रिव्यू करने पर सहमत हो गया है। कोर्ट ने सोमवार को गृह मंत्रालय सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अखिल भारतीय दिशा-निर्देशों की मांग करने वाली जनहित याचिका में बलात्कार के दोषियों की रासायनिक नसबंदी, पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और विभिन्न मंत्रालयों को मामलों में कोई जमानत नहीं देने की मांग पर नोटिस भी भेजा है और चार सप्ताह में जवाब भी मांगा है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट महिला वकील एसोसिएशन की तरफ से सीनियर वकील महालक्ष्मी पावनी ने दायर की है। मामले की सुनवाई जनवरी 2025 में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, मस्जिद में जय श्रीराम का नारा लगाना अपराध कैसे
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। जस्टिस पंकज मित्तल और संदीप मेहता की पीठ ने पूछा कि किसी धार्मिक वाक्यांश का नारा लगाना अपराध कैसे हो सकता है। ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना कैसे आपराधिक कृत्य है। याचिका में कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मस्जिद के अंदर कथित तौर पर ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने वाले दो व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी गई थी।








