
मानसा/बरेटा, 22 दिसंबर:
ज़िला मानसा के गांव कुलरियां की अमनजीत कौर फूलों की खेती के माध्यम से जहां युवाओं के लिए उदाहरण बनी हैं, वहीं अपने परिवार की आर्थिक सहारा भी बनी हैं।
गांव कुलरियां की अमनजीत कौर (25 वर्ष) के पिता श्री जीता सिंह ने बताया कि उनके पिता सवा 2 बीघा जमीन की खेती करते हैं और परिवार में माता-पिता और उनके दो भाई हैं। इतनी कम जमीन से परिवार का गुज़ारा करना बहुत कठिन था। उन्होंने बताया कि पीजीडीसीए की फीस भी मुश्किल से स्वै-संस्था और परिवार की मदद से भरी थी। वित्तीय हालात खराब होने के कारण आगे की पढ़ाई का कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्होंने विदेश जाने के लिए आईलैट्स भी किया था, लेकिन विवाह के कारण विदेश जाने की बजाय वह अपने देश में ही अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं।
अमनजीत ने बताया कि वह गांव के गुरुद्वारा साहिब में फूलों की सजावट की सेवा करती थीं, तभी उनके मन में फूलों की खेती करने का विचार आया। उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में संपर्क किया और वहां HOD (Floriculture) डॉ. परमिंदर सिंह और साइन्टिस्ट डॉ. अमन शर्मा से मार्गदर्शन लिया। 2022 में उन्होंने 7 मरले में गेंदे का पौधा लगाया, जिससे उन्हें पर्याप्त वित्तीय सहारा मिला। अब वह 1 कनाल में फूलों की खेती कर रही हैं, जिसकी आमदनी से वह एम. पंजाबी (दूसरा वर्ष) गुरु नानक कॉलेज बुढलाडा से पढ़ाई कर रही हैं और अपने परिवार का आर्थिक सहारा भी बनी हैं।
अमनजीत ने बताया कि उनके खेत के फूल बरेटा, बुढलाडा, मानसा, सुनाम, बठिंडा, जाखल, लुधियाना आदि शहरों में जा रहे हैं। गेंदे के फूलों की कटाई लगभग 3 महीने चलती है और इससे उन्हें लगभग 40 हजार की बचत होती है, जो लगभग 1 बीघा गेहूं/झोने के बराबर है।
अमनजीत बताती हैं कि वह बागबानी विभाग, मानसा के साथ भी तालमेल में हैं और विभाग समय-समय पर मार्गदर्शन करता रहता है। पिछले मौसम में बारिश के कारण पौधे खराब हो गए थे, जिस पर विभाग ने उन्हें पौधे उपलब्ध कराए।
अमनजीत का कहना है कि युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रयास करने चाहिए ताकि वह आगे जाकर सफल हो सकें।
डिप्टी कमिश्नर नवजोत कौर ने की प्रशंसा
डिप्टी कमिश्नर मानसा, नवजोत कौर, IAS ने किसान मेले के दौरान अमनजीत कौर से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भले ही अमनजीत थोड़े क्षेत्र में फूलों की खेती कर रही हैं, लेकिन अपने प्रयासों से अपने और परिवार के लिए वित्तीय सहारा बनी हैं। उन्होंने कहा कि यह युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो विदेश जाने की बजाय अपने गांव में मेहनत कर रही हैं।









