बागवानी विभाग ने कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भारत के सभी राज्यों से आगे किया: मोहिंदर भगत

चंडीगढ़, 25 दिसंबर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार प्रदेश में बागबानी क्षेत्र का विस्तार करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रही है। बागबानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत के निर्देशों के तहत बागबानी विभाग किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा फसल विविधता अपनाने के लिए पूरी सहायता प्रदान कर रहा है। बागबानी क्षेत्र को प्रफुल्लित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। बागबानी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए किसानों को अत्याधुनिक तकनीक के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करवाई जा रही है। बागबानी विभाग ने वर्ष 2025 में विभिन्न पहलकदमियां कीं और नई ऊँचाइयों को छुआ।
बागबानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत ने जानकारी देते हुए बताया कि बागबानी विभाग कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में पिछले साल की तरह इस वर्ष भी भारत के सभी राज्यों से आगे रहा है। उन्होंने बताया कि एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) केंद्रीय योजना को प्रदेश में सुव्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए बागबानी विभाग नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। अब तक कृषि के 30,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स के लिए 7,100 करोड़ रुपये के AIF स्कीम तहत ऋण मंजूर किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि मान सरकार प्रदेश में बागबानी को प्रफुल्लित करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि बागबानी विभाग के लगातार प्रयासों से प्रदेश का बागबानी क्षेत्र 4,81,616 से बढ़कर अब 5,21,000 हेक्टेयर हो गया है।
उन्होंने बताया कि बागबानी क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन देने और किसानों को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने के लिए लुधियाना में लाढ़ोवाल में अत्याधुनिक बागबानी विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र वन-स्टॉप ज्ञान केंद्र के रूप में काम करेगा और राज्य भर के किसानों को गेहूं-झोने के फसल चक्र से उच्च मूल्य वाली बागबानी फसलों की ओर प्रेरित करेगा।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ‘अपना गांव-अपना बाग़’ मुहिम की शुरुआत की गई है। इससे बागबानी क्षेत्र को नई दिशा मिली है। इस प्रोजेक्ट के तहत गांवों की पंचायती जमीनों पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इन बागों से होने वाली आमदनी संबंधित पंचायत द्वारा गांव के विकास पर खर्च की जाएगी।
उन्होंने कहा कि नेशनल हर्टिकेचर मिशन के तहत किसानों को नए बाग लगाने, सब्जियों और फूलों की खेती, मशरूम, बी-किपिंग के लिए 15.75 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता के रूप में दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि स्टेट प्लान स्कीम के तहत फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए बागबानी विभाग ने किसानों को 14,000 रुपये प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता दी है। इस योजना के तहत किसानों को चालू वित्तीय वर्ष में 17.40 लाख रुपये सब्सिडी के रूप में दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पोस्ट हार्वेस्ट हैंडलिंग स्कीम के तहत फलों और सब्जियों की तुड़ाई के बाद प्लास्टिक क्रेट और कार्टन बॉक्स पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में किसानों को 23.26 लाख रुपये की सब्सिडी जारी की गई है।
उन्होंने कहा कि ‘बिजली और पानी बचाओ स्कीम’ के तहत ड्रिप पर बाग लगाने वाले किसानों को 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर इंसेंटिव दिया जा रहा है। इस साल 47.56 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने बताया कि पॉली-हाउस का कवर मटीरियल बदलने के लिए भी 50 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 140.51 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई है।
मंत्री ने आगे बताया कि मशरूम के छोटे यूनिट्स को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 80,000 रुपये सब्सिडी दी गई है। इस वर्ष किसानों को 54.66 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि निर्यात-आयात विविधता को बढ़ावा देने के लिए इंडो-डच समझौते के तहत खेड़ी, संगरूर में प्याज के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रगति अधीन हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन एस्टेट – नाश एस्टेट, अमृतसर; लीची एस्टेट, पठानकोट; और अमरूद एस्टेट, पटियाला की स्थापना की गई है। इससे प्रदेश में फलों की अधिक पैदावार और किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।
बागबानी मंत्री ने बताया कि मान सरकार द्वारा सब्जी उगाने वाले बाढ़ पीड़ित किसानों को विशेष राहत देने के उद्देश्य से उनकी वास्तविक लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा है।
इसके अलावा बागबानी मंत्री ने कहा कि राज्य में बागबानी को प्रफुल्लित करने के लिए नए उपाय किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और वे खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकेंगे।









