
महेंद्रगढ़ जिले के गांव ककराला की 28 वर्षीय पीएचडी शोध छात्रा ज्योति की पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस हादसे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए वाटर वर्क्स विभाग के दो अधिकारियो लखविंदर सिंह धनोआ और कार्यकारी अभियंता अनिल ठाकुर को निलंबित कर दिया है, लेकिन इस कार्रवाई के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो क्या यह हादसा टाला जा सकता था।
हाल ही में हुई बारिश के बाद विश्वविद्यालय परिसर के एक हिस्से में जलभराव हो गया था। बताया जा रहा है कि ज्योति पानी से भरे रास्ते के किनारे बने कच्चे मार्ग से गुजर रही थी, तभी वह करंट की चपेट में आ गई। छात्रों का आरोप है कि शॉर्ट सर्किट के कारण बिजली का करंट बारिश के पानी में फैल गया था, जिससे यह हादसा हुआ। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि विद्युत सुरक्षा में गंभीर लापरवाही का मामला माना जाएगा।
छात्रों का कहना है कि परिसर में जलभराव, खुले बिजली के तार और विद्युत सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण आखिरकार एक होनहार शोध छात्रा की जान चली गई।








