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हक पाने को गरजे कम्प्यूटर शिक्षक; मांगें न मानी, तो सीएम आवास का करेंगे घेराव

श्रीआनंदपुर साहिब-पंजाब भर के कम्प्यूटर शिक्षकों ने अपने अधिकारों की बहाली और सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सैकड़ों शिक्षक बीते 82 दिनों से संगरूर के डीसी कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने अब 24 नवंबर को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निवास का घेराव करने का निर्णय लिया है। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि वे केवल बैठक के पत्र लेकर वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा की गई घोषणाओं को लागू करवाने से संबंधित पत्र लेकर ही आंदोलन को विराम देंगे।

कंप्यूटर शिक्षक संघर्ष समिति के नेताओं परमवीर सिंह पम्मी, जोनी सिंगला, प्रदीप कुमार मलूका, रजवंत कौर, रणजीत सिंह, लखविंदर सिंह, गुरबख्श लाल, जसपाल, उधम सिंह डोगरा, बवलीन बेदी, सुनीत सरीन, सुमित गोयल, रजनी, धरमिंदर सिंह, नरिंदर कुमार, राकेश सैनी, सुशील अन्गुराल, प्रियंका बिष्ट, मनजीत कौर, कर्मजीत पुरी, गगनदीप सिंह ने बताया कि पांच नवंबर को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक बैठक में उनकी मांगों को कुछ ही दिनों के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो सप्ताह बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षकों का कहना है कि 20 नवंबर को वित्त मंत्री ने एक पैनल बैठक तय की थी, लेकिन 19 नवंबर की शाम को बिना किसी कारण उसे रद्द कर दिया गया।

इसके विरोध में, शिक्षकों ने अपने-अपने स्कूलों में कार्य समय के बाद वित्त मंत्री के साथ मीटिंग के पत्रों की प्रतियां जलाकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने विधानसभा चुनावों से पहले उनकी मांगों को जायजा ठहराते हुए सरकार बनने पर उन्हें तुरंत पूरा करने का वादा किया था। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी 15 सितंबर 2022 को दिवाली तक उनकी मांगों को पूरा करने का ऐलान किया था, लेकिन तीन दिवालियां बीतने के बाद भी यह वादा अधूरा है, जो सरकार की कथनी और करनी के बीच के अंतर को साफ दर्शाता है।

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