Economic Survey: सात फीसदी से कम रहेगी GDP, वित्त मंत्री ने पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए आर्थिक सर्वे में अगले वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 फीसदी से लेकर 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया गया है, जो कि बीते चार सालों में सबसे कम विकास दर रहने का अनुमान है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में देश के आर्थिक सेहत का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के लिए अगले एक से दो दशक तक आठ फीसदी के दर से आर्थिक विकास करना होगा। हालांकि यह बेहद महत्त्वपूर्ण है कि वैश्विक हालात जिसमें राजनीतिक और आर्थिक हालात शामिल हैं, वे भारत के आर्थिक विकास के परिणामों को प्रभावित करेंगे।
आर्थिक सर्वे 2024-25 के मुताबिक लेबर रिफाम्र्स के चलते श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जा सकी है, तो इसके चलते रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। आर्थिक सर्वे की मानें, तो आम लोगों को मौजूदा तिमाही में महंगाई से राहत मिल सकती है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता से जोखिम बना हुआ है। सर्वे के मुताबिक खुदरा महंगाई दर को वित्त वर्ष 2024-25 में चार साल के निचले लेवल 5.4 फीसदी पर लाने में सफलता मिली है। सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में सब्जियों की कीमतों और खरीफ फसल के आवक से खाद्य महंगाई में कमी आने की उम्मीद है। बेहतर रबी फसल के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर लगाम लगेगी। हालांकि खराब मौसम और इंटरनेशनल मार्केट में एग्रीकल्चर कमोडिटी के दामों में उछाल से जोखिम बना हुआ है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में कहा गया है कि देश में रोजगार के अवसरों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और वित्त वर्ष 2023-24 में बेरोजगारी की दर घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर छह प्रतिशत रही थी। वित्त मंत्री ने कहा किदेश में रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं और बेरोजगारी की दर घट रही है और श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी में इजाफा हो रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024 में कारपोरेट क्षेत्र का लाभ 15 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन मजदूरी दर में अभी काफी विसंगतियां हैं। सर्वेक्षण में कारपोरेट क्षेत्र, विशेष रूप से बड़ी फर्मों के लाभ में आय असमानता को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।
भारत का वित्तीय क्षेत्र सकारात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और एक नए युग की शुरुआत हो रही है, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि ‘वित्तीयकरण’ जैसे उभरते रुझान, जिसमें पूंजी बाजार नीति और परिणामों को प्रभावित करते हैं, पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। प्रतिकूल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत के बाहरी क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन देश को व्यापार लागत को कम करने की जरूरत है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में कनेक्टिविटी संबंधी बुनियादी ढांचे में निवेश के कारण संपर्क सुविधा में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा है और भारत की उच्च विकास दर बनाए रखने के लिए आगामी दो दशकों तक कनेक्टिविटी संबंधी बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश बनाए रखने की आवश्यकता है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी में तेजी लाने की जरूरत है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के प्रयास सरकार की बजट बाधाओं को देखते हुए इन आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा नहीं कर सकते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि श्रम पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव दुनिया भर में महसूस किया जाएगा, लेकिन भारत में इसके आकार और कम प्रति व्यक्ति आय को देखते हुए यह एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। कारपोरेट क्षेत्र को उच्च स्तर की सामाजिक जिम्मेदारी दिखानी होगी। हालांकि श्रम पर एआई का प्रभाव दुनिया भर में महसूस किया जाएगा, लेकिन भारत के लिए यह समस्या बहुत बड़ी है, क्योंकि इसका आकार और प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम है।
आर्थिक सर्वेक्षण में चिंता, सोशल मीडिया ने बिगाड़ी युवाओं की मेंटल हेल्थ
इकोमॉनिक सर्वे के मुताबिक युवाओं के मेंटल हेल्थ ही भविष्य में अर्थव्यवस्था को गति देगा। लाइफस्टाइल च्वाइस, वर्कप्लेस कल्चर और परिवार के हालात प्रोडक्टिविटी के लिए बेहद मायने रखते हैं। सोशल मीडिया पर खाली समय व्यतीत करना, व्यायाम नहीं करना और परिवार के साथ पर्याप्त समय व्यतीत नहीं करने के चलते युवाओं की मेंटल हेल्थ प्रभावित हो रही है।
भारत की राह में रोड़ा न बन जाए ट्रंप का टैरिफ
2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य को पाने के लिए भारत काम कर रहा है, लेकिन वैश्विक माहौल खासकर राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य भारत की ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर तब जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ में बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप ने भारत को उन देशों में शामिल किया है, जहां बहुत टैरिफ है। इतना ही नहीं अमरीकी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों को धमकी दी है कि अगर उन्होंने अपनी करेंसी बनाने की कोशिश की, तो उन पर 100 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। भारत ब्रिक्स का फाउंडिंग मेंबर है। अमरीका भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। ऐसे में ट्रंप का टैरिफ भारत को महंगा पड़ सकता है।








