द्विपक्षीय स्तर पर हुआ भारत पाक के बीच संघर्ष विराम, विदेश सचिव ने खारिज किया ट्रंप का दावा

नई दिल्ली
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने संसद की स्थायी समिति के सामने सोमवार को सीजफायर में ट्रंप की भूमिका और पाकिस्तान, तुर्की से साथ तनावपूर्ण संबंधों समेत कई मुद्दों पर अपनी बातें रखीं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष पर संसदीय समिति को ब्रीफ किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एयरस्ट्राइक और 10 मई को हुए भारत-पाकिस्तान सीजफायर सहमति की पूरी जानकारी दी। बैठक में कांग्रेस सांसद शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस के राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और बीजेपी की अपराजिता सारंगी व अरुण गोविल जैसे कई सदस्य मौजूद रहे।
इस दौरान विदेश सचिव ने कहा कि भारत-पाक के बीच मध्यस्थता को लेकर किए जा रहे ट्रंप के दावे सही नहीं हैं। इस दौरान समिति ने एक स्वर में मिस्री और उनके परिवार पर हुए साइबर हमले की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान मिसरी ने संसदीय समिति को बताया, कि भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम पूरी तरह द्विपक्षीय स्तर पर हुआ और ट्रंप के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने सीजफायर के बीच में आने के लिए हमसे कोई अनुमति नहीं ली थी, वह आना चाहते थे, इसलिए आ गए।
तुर्की से हमारे संबंध कभी बुरे नहीं रहे
तुर्की से संबंधों पर मिसरी ने कहा कि हमारे तुर्की से कभी बुरे रिश्ते नहीं रहे, लेकिन हम कभी करीबी साझेदार भी नहीं रहे। तुर्की के साथ किसी भी संघर्ष में व्यापार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।
पाक से हमारे रिश्ते शुरू से ही खराब
पाकिस्तान को लेकर उन्होंने दो टूक कहा कि 1947 से ही हमारे पाकिस्तान के साथ रिश्ते खराब रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच लगातार संवाद होता रहता है। इसके अलावा, विदेश सचिव ने समिति को बताया कि भारत-पाक टकराव पारंपरिक हथियारों तक ही सीमित रहा और पाकिस्तान की ओर से किसी तरह का परमाणु हमला करने की कोई धमकी नहीं मिली।
विपक्ष के सवाल
क्या संघर्ष में चीन के हथियार इस्तेमाल हुए?
विपक्ष ने पूछा कि क्या इस संघर्ष में चीन निर्मित हथियारों का इस्तेमाल हुआ? इस पर विदेश सचिव ने दो टूक कहा कि किसने क्या इस्तेमाल किया, इससे फर्क नहीं पड़ता। हमने उनके एयरबेस तबाह कर दिए, यही मायने रखता है।
संघर्ष में भारत ने कितने विमान गंवाएं?
जब सदस्यों ने पूछा कि भारत ने कितने विमान इस संघर्ष में गंवाए, तो विदेश सचिव ने कहा कि यह सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
गलत तरीके से पेश किया जयशंकर का बयान
कुछ सदस्यों ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को लेकर सवाल उठाए, जिस पर सरकार ने कहा कि बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद ही पाकिस्तान को सूचित कर दिया गया था कि हमारी कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों को लेकर है।








