सुखोई फाइटर जेट को मिली एआई की ताकत, रूस ने टेस्ट किया नया वर्जन, तेजी से फैसले ले सकेंगे पायलट

नई दिल्ली
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमानों ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की। अब रूस ने इस विमान का नया वर्जन लॉन्च किया है। रूस ने हाल ही में सुखोई एसयू-57एम फाइटर जेट के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-असिस्टेड वर्जन का सफल परीक्षण किया है। रूस ने एसयू-57एम की पहली एआई-एसिस्टेड फ्लाइट को फिलहाल एक प्रोटोटाइप के रूप में तैयार किया गया है। जानकार इस प्रयोग को रूस के एयरोस्पेस इतिहास में मील का पत्थर बता रहे हैं। रूस की टेस्टिंग के दौरान एक पायलट कॉकपिट में मौजूद था।
हालांकि फाइटर जेट की फ्लाइट कंट्रोल, नेविगेशन और टारगेट चुनने की क्षमता जैसी चीजें एआई की मदद से ही नियंत्रित की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि एआई की मदद से पायलट तेजी से फैसले ले सकेंगे। वहीं यह पायलट के लोड को कम करने और हाई रिस्क वाले फैसले लेने में भी मदद कर सकता है।
अमरीकी जेट को देगा सीधी टक्कर
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक यह तकनीक जल्द ही आसमानी वारफेयर का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। बता दें कि रूस 1999 से ही पीएके एफए नाम का कार्यक्रम चला था है, जो एआई इंटीग्रेशन के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद पांचवीं पीढ़ी के फाइटर्स को तैयार करना था। एसयू-57एम, एसयू-57 का एक बेटर वर्जन है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह मॉडल अमरीका के एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग-2 जैसे जेट को सीधी टक्कर दे सकता है।
भारत के पास 250 से अधिक सुखोई
बता दें कि सुखोई जेट्स भारतीय वायुसेना के बेड़े का सबसे अहम हिस्सा हैं। भारतीय वायुसेना के पास 250 से अधिक एसयू-30 एमकेआई विमान हैं। भारत के सबसे बड़े रक्षा सहयोगी रूस के साथ 1996 में हुए एक सौदे के तहत एसयू-30 एमकेआई कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। तब से इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा असेंबल और निर्मित किया जाता रहा है। अब रूस के इस कदम से भारतीय बेड़े में भी नई तकनीक शामिल की जा सकेगी।








