
चंडीगढ़, 30 दिसंबर
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह योजनाबद्ध तरीके से मनरेगा योजना को समाप्त कर रही है और गरीबों से उनकी रोज़ी-रोटी का अधिकार छीन रही है। विधानसभा में मनरेगा योजना में हाल ही में किए गए बदलावों और इसका नाम बदलकर ‘विकसित भारत – ग्राम जी’ रखे जाने के विरोध में पेश प्रस्ताव का समर्थन करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने इस कदम को “हाशिये पर धकेले गए लोगों के पेट पर हमला” करार दिया।
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक महिला मनरेगा मजदूर चरणजीत कौर का भावुक पत्र पढ़कर सुनाया, जिसमें हजारों ग्रामीण मजदूरों के डर को उजागर किया गया था। चरणजीत कौर ने पत्र में चिंता जताई कि बदलते नियमों और केंद्रीकृत गांवों की सूचियों के कारण बच्चे शिक्षा से और बुजुर्ग दवाइयों से वंचित रह जाएंगे। वित्त मंत्री चीमा ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार योजना का केंद्रीकरण करके और मोबाइल-आधारित जटिल हाजिरी प्रणाली लागू कर उस “गारंटी” को खत्म कर रही है, जो कभी ग्रामीण जीवन की रीढ़ थी।
बाबा साहिब डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान की भावना के विरुद्ध काम करने के लिए भाजपा की आलोचना करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र की नीतियां संविधान की प्रस्तावना (प्रीएंबल) को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना, जो राष्ट्र के मूल सिद्धांतों और मूल्यों को दर्शाती है, केंद्र की नीतियों से कमजोर की जा रही है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना भारत को एक “संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” के रूप में स्थापित करती है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसलों में बार-बार स्पष्ट किया है कि संविधान की प्रस्तावना, जो इसके पवित्र स्वरूप की पुष्टि करती है, को बदला या विकृत नहीं किया जा सकता।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार हर योजना का केंद्रीकरण करके देश के मजदूरों को “बंधुआ मजदूर” और केंद्रीय व्यवस्था के “गुलाम” बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण सहकारी संघीय ढांचे को नष्ट कर रहा है, राज्यों के अधिकार छीन रहा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है।
धार्मिक प्रतीकों के नाम पर योजना का नाम बदलने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि जहां पूरी दुनिया भगवान राम का सम्मान करती है, वहीं सरकारी योजना के लिए धार्मिक नाम का इस्तेमाल सरकार को आलोचना से बचाने की एक राजनीतिक चाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जिसके तहत अपनी मजदूरी या अधिकार मांगने वाले प्रदर्शनकारियों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया जा सकता है।
केंद्र की नीतियों की पंजाब सरकार की पहलों से तुलना करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा कि आम आदमी पार्टी ठोस कदमों के जरिए दलित समुदाय के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार मान मंत्रिमंडल में 15 में से 6 मंत्री दलित समुदाय से हैं, जो एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रतिनिधित्व है। एक अन्य ऐतिहासिक पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह भी पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दलित परिवार से संबंधित व्यक्ति को वित्त मंत्री नियुक्त किया है—एक ऐसा पद, जो पिछली कांग्रेस और अकाली सरकारों ने कभी किसी दलित नेता को नहीं सौंपा।
वित्त मंत्री ने आगे बताया कि ‘आप’ सरकार अब तक 15,000 से अधिक दलित युवाओं को सरकारी नौकरियां दे चुकी है और लगभग 5,000 जरूरतमंद दलित परिवारों के कर्ज माफ किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्ष 2025-26 के बजट में एस.सी./एस.टी. सब-प्लान के तहत लगभग 14,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि यह पंजाब के इतिहास का सबसे बड़ा आवंटन है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कुल विकास बजट का 34 प्रतिशत विशेष रूप से हाशिये पर पड़े और वंचित वर्गों के विकास के लिए समर्पित है।
शिक्षा के क्षेत्र में आई क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के 267 से अधिक विद्यार्थियों—जिनमें से अधिकांश मजदूरों के बच्चे हैं—ने जे.ई.ई. परीक्षा पास की और 235 ने दाखिला हासिल किया, जबकि 847 विद्यार्थियों ने नीट पास किया और 560 को दाखिला मिला। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को चुनौती दी कि वे अपने शासनकाल की ऐसी मिसालें पेश करें। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पहली बार इस सशक्तिकरण को कानूनी क्षेत्र में भी लागू किया है, जहां एडवोकेट जनरल के कार्यालय में दलित वकीलों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण लागू कर गरीब लोगों और सफाई कर्मचारियों के 58 बच्चों को उच्च स्तरीय कानूनी पदों पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब भारत का एकमात्र राज्य है जिसने दलित वकीलों को ऐसा आरक्षण प्रदान किया है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार को एक व्यापक राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन की चेतावनी देते हुए घोषणा की कि पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी मजदूरों के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी। उन्होंने पंजाब विधानसभा के स्पीकर से अपील की कि मनरेगा मजदूरों से प्राप्त सैकड़ों पत्र—जिनमें से कई पर अंगूठे के निशान हैं—प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे जाएं, ताकि इन नीतिगत बदलावों की मानवीय कीमत सामने लाई जा सके। उन्होंने घोषणा की, “हम भाजपा को कॉरपोरेट हितों के लिए मजदूरों के मुंह से रोटी छीनने नहीं देंगे।”









