
चंडीगढ़, 30 दिसंबर:
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी योजना) अधिनियम, 2025 ने गांवों की गरीब आबादी और हाशिये पर रहने वाले समुदायों को उपयुक्त रोजगार के अवसरों से वंचित कर उन्हें गंभीर झटका दिया है।
यह जानकारी आज यहां खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले, वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री श्री लाल चंद कटारूचक ने पंजाब विधानसभा में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद द्वारा वीबी जी राम जी योजना के संबंध में पेश किए गए प्रस्ताव पर बोलते हुए दी।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि यदि राज्य सरकार नए अधिनियम के तहत कार्य करती है, तो नया बजट भारत सरकार द्वारा निर्धारित बजट आवंटन से अधिक होगा और इस योजना पर होने वाला 100 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार को स्वयं वहन करना पड़ेगा।
पहले मनरेगा योजना के तहत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी और प्रशासनिक खर्च का 100 प्रतिशत वहन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था, जिससे राज्यों पर सीमित वित्तीय बोझ पड़ता था। लेकिन वीबी जी राम जी योजना अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों के बीच यह अनुपात 60:40 कर दिया गया है। इस बदलाव से उन राज्यों पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो पहले से ही वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, यह परिवर्तन संघीय ढांचे की भावना के भी विपरीत है।
मनरेगा पंजाब जैसे राज्य में मुख्य रूप से सबसे गरीब ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है। पिछले वित्तीय वर्षों में पंजाब में मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों की संख्या हर वर्ष बढ़ी है। ऐसी स्थिति में कृषि सीजन के दौरान 60 दिनों के लिए काम रोकने की व्यवस्था से जॉब कार्ड धारकों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों, महिलाओं और भूमिहीन परिवारों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इन 60 दिनों की अवधि के दौरान कुशल श्रमिकों को रोजगार के कुछ अवसर मिल सकते हैं, लेकिन उन्हें मनरेगा योजना के तहत मिलने वाली सुनिश्चित दैनिक मजदूरी प्राप्त नहीं होगी।
श्री कटारूचक ने बताया कि मनरेगा को बंद करने से इस अवधि के दौरान महिला श्रमिकों और बुजुर्ग श्रमिकों के पास रोजगार का कोई विकल्प नहीं बचेगा। परिणामस्वरूप, न तो उन्हें उपयुक्त कार्य के अवसर मिलेंगे और न ही मनरेगा अधिनियम के तहत एक अधिकार के रूप में दी जाने वाली गारंटीशुदा दैनिक मजदूरी का भुगतान होगा।
मनरेगा में ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत परियोजनाएं सीधे गांव स्तर पर योजनाबद्ध की जाती हैं। वीबी जी राम जी योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर ‘नेशनल स्टैक’ की स्थापना से स्थानीय आवश्यकताओं और ग्राम सभा की भूमिका कम हो जाती है, जिससे केंद्रीकरण की स्थिति उत्पन्न होगी।
वीबी जी राम जी योजना अधिनियम के तहत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और भू-स्थानिक योजनाओं जैसी तकनीकी निगरानी पर अधिक जोर दिया गया है, जो ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों की लोकतांत्रिक तथा निर्णय लेने की भूमिका को कमजोर करता है। तकनीकी त्रुटियां, सर्वर समस्याएं या डिजिटल प्रणाली की विफलताएं श्रमिकों के भुगतान में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं या उन्हें पूरी तरह से काम से वंचित भी कर सकती हैं।
श्री कटारूचक ने आगे कहा कि यह स्थिति विशेष रूप से गांवों के गरीबों और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के लिए अत्यंत चिंताजनक है, जिनकी डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच पहले से ही सीमित है।









