
चंडीगढ़, 30 जनवरी:
खनिज पदार्थों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने, राज्य के राजस्व में वृद्धि करने और खनन क्षेत्र में नियामक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने राज्य भर में लीगल (कानूनी) माइनिंग साइटों को तेजी से क्रियाशील करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अवैध माइनिंग गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी कड़े आदेश जारी किए हैं।
यहां महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (मैगसीपा) में खनन एवं भू-विज्ञान विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कैबिनेट मंत्री ने अनिवार्य अनुमतियां जारी करने की प्रक्रिया और कार्यान्वयन ढांचे की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला माइनिंग अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के माध्यम से जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों की स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाएं, ताकि अधिक से अधिक कानूनी माइनिंग साइटों को तुरंत क्रियाशील किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे अवैध माइनिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ बाजार की मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि माइनर खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और अवैध माइनिंग को रोकने के लिए समय पर अनुमतियां जारी करना अत्यंत आवश्यक है।
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री ने ठेके पर दी गई नई साइटों और बड़ी माइनिंग साइटों से संबंधित सभी लंबित पर्यावरणीय अनुमतियों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि लीगल माइनिंग साइटों का विस्तार बाजार की मांग को पूरा करने और अवैध माइनिंग गतिविधियों के कारण होने वाले राजस्व नुकसान को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
आईआईटी रोपड़ द्वारा हाल ही में किए गए सर्वेक्षण का हवाला देते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने निर्देश दिए कि कानूनी रूप से माइनिंग सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिन्हित की गई सभी नई साइटों को जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट चरण-III में शामिल किया जाए। उन्होंने सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों और जिला माइनिंग अधिकारियों को अवैध माइनिंग के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को बनाए रखने और इसके जमीनी स्तर पर सख्त क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भी कहा।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता बढ़ाने, रेत और खनिजों की माइनिंग को नियमित करने तथा नदी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए माइनिंग स्थलों के नीलामी-आधारित आवंटन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि नदी विज्ञान, भूजल संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन से संबंधित पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए इनके त्वरित मूल्यांकन के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति और एसईआईएए के साथ निकट समन्वय बनाए रखा जा रहा है।
बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती जसप्रीत तलवाड़, डायरेक्टर माइनिंग श्री अभिजीत कपलिश, चीफ इंजीनियर (माइनिंग) सरदार हरदीप सिंह मेंदीरत्ता, सभी सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर तथा विभिन्न जिलों के माइनिंग अधिकारी उपस्थित थे।









