
चंडीगढ़, 20 फरवरी:
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस–2026, जो हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है, के महत्व को रेखांकित करने और मातृभाषा पंजाबी को और अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आज पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त इंदरपाल सिंह धन्ना द्वारा एक साहित्यिक ब्रोशर जारी किया गया। यह विमोचन राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू, वरिंदरजीत सिंह बिलिंग, डॉ. भूपिंदर सिंह बाठ, संदीप सिंह धालीवाल, पूजा गुप्ता तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव, पंजाब सरकार डी.के. तिवाड़ी की उपस्थिति में किया गया।
यह साहित्यिक ब्रोशर राज्य सूचना आयुक्त, पंजाब हरप्रीत संधू द्वारा लिखा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस–2026 की थीम ‘बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज़’ को उजागर करते हुए समाज में मातृभाषा “पंजाबी” को मान्यता देने और उसकी गरिमा बहाल करने की आवश्यकता पर बल देता है।
पंजाब सूचना आयोग मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू ने बताया कि यह चित्रात्मक (तस्वीरों सहित) ब्रोशर नेल्सन मंडेला के प्रेरणादायक शब्दों—
“यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो आपके शब्द उसके दिमाग तक पहुंचते हैं; लेकिन यदि आप उससे उसकी मातृभाषा में बात करते हैं, तो वे उसके दिल तक पहुंचते हैं।”
से प्रेरित होकर तैयार किया गया है, ताकि मातृभाषा पंजाबी की गौरवशाली विरासत को और समृद्ध किया जा सके।
राज्य सूचना आयुक्त, पंजाब ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस–2026 का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए मातृभाषा को अपनाने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव, सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पंजाब, डी.के. तिवाड़ी ने हरप्रीत संधू द्वारा तैयार किए गए इस साहित्यिक ब्रोशर की सराहना करते हुए इसे पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए एक सार्थक पहल बताया।
इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू, वरिंदरजीत सिंह बिलिंग, डॉ. भूपिंदर सिंह बाठ, संदीप सिंह धालीवाल और पूजा गुप्ता ने भी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मातृभाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की आत्मा है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमारे इतिहास तथा परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाती है। राज्य सूचना आयुक्तों ने यह भी कहा कि अपनी मातृभाषा को संजोकर और प्रोत्साहित करके हम न केवल अपनी विरासत का सम्मान करते हैं, बल्कि मानवता की विविधता और एकता में भी योगदान देते हैं।









