उत्तर प्रदेशधर्म

इफ्तार के बाद ली अंतिम सांस, कमिश्नर ने जताया शोक

इफ्तार के बाद ली अंतिम सांस, कमिश्नर ने जताया शोक

शहर-ए-काजी मौलाना यासीन का इंतकाल, रोजा इफ्तार के बाद ली अंतिम सांस, कमिश्नर ने जताया शोक

बाराणसी शहर-ए-काजी अल्लामा व मौलाना मुफ्ती गुलाम यासीन का गुरुवार को इंतकाल हो गया। वह 90 साल के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनको शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद सुपुर्दे खाक किया जाएगा। 50 सालों से काजी रहे और शहर में अमनपरस्ती के लिए हमेशा आगे रहे। सीएए व एनआरसी के विरोध के दौरान शांति कायम करने में प्रशासन की मदद की थी। उनके निधन पर कमिश्नर कौशल राज शर्मा ने शोक जताया।

मौलाना गुलाम यासिन दिनभर रोजा रखे। रोजा इफ्तार करने के बाद तिलभांडेश्वर पार्क के पास अपने आवास पर अंतिम सांस ली। इसकी खबर उनके चाहने वालों तक पहुंची तो उनकी भीड़ उमड़ पड़ी। उनकी पत्नी का 2010 में इंतकाल हो गया था। वह अपने पीछे दो बेटे व एक बेटी सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए। बेटे साड़ी का कारोबार करते हैं।

उनके बड़े बेटे जावेद अहमद ने बताया कि जुमे की नमाज के बाद दोपहर 3.30 बजे बजरडीहा क्षेत्र के ब्रजइंक्लेब कॉलोनी स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया जाएगा। उनके जनाजे की नमाज मौलवी जमील अहमद पढ़ाएंगे। मौलाना गुलाम यासिन के मुरीद पूर्वांचल के अलावा नेपाल तक हैं। बिहार में भी काफी उनके चाहने वाले थे, वह उनसे मिलने आते थे। तमाम दीनी मामलों में जानकारी लेने आते थे।

जारी करते थे फतवा

मौलाना गुलाम यासिन फतवा भी जारी करते थे तथा लोगों को मुरीद (गुरुमंत्र) बनाते थे। वह मरकजी हेलाल चांद कमेटी ईद, बकरीद आदि त्योहारों पर चांद का एलान करते थे। उनकी जुलूसे मोहम्मदी सुन्नी जमुतुलमा बनारस कमेटी की निगरानी में जुलूस निकाला जाता था। वह इसमें खुद शामिल होते थे। काशी से काबा की यात्रा करने वालों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते थे।

दिल्ली में नरेंद्र मोदी को दिए थे बधाई

बनारस से पहली बार नरेंद्र मोदी के चुनाव जीतने के बाद वह प्रधानमंत्री बने। इसके बाद मौलाना गुलाम यासिन दिल्ली गए थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी।

*खलीफा ए मुफ्ती ए आजम हिंद ने बनाया था काजी*

मौलाना गुलाम यासिन बरेली विचारधारा के सबसे बड़े धर्मगुरु खलीफा ए मुफ्ती ए आजम हिंद के शागीर्द थे। उन्होंने ही यासिन को खलीफा के बाद शहर ए काजी बनाया। तब से शहर में काजी के पद वह कार्यरत थे। वह देश-विदेश में तकरीर करने जाते थे।

डीएम व एसएसपी के साथ की थी शांति की अपील

सीएए व एनआरसी के विरोध के बीच गुलाम यासिन ने शांति कायम करने में मदद की। तत्कालीन जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने उनको लेकर शहर में भ्रमण किए और लोगों को अमन-चैन की अपील की थी।

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